नई दिल्ली: आज देश गांधी जयंती और दशहरा मना रहा है। दशहरा पर हम अपने अंदर के रावण को जला कर राम के सिखाये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। वहीं गांधी हमें सत्य और अहिंसा के पथ पर दृढ़ रहना सिखाते हैं। राम और गांधी का रिश्ता जगजाहिर है। जब गांधी की हत्या की गई थी तो अपने आखिरी समय में उनके मुंह से निकला था हे राम। लेकिन क्या आपको मालूम है कि गांधी राम के इतने करीब कैसे आये?
किससे डरते थे गांधी
दरअसल बचपन में गांधी जी बहुत डरते थे- खासकर भूत से उनको बहुत डर लगता था। अपनी आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग में गांधी जी बताते हैं कि एक बार दूसरे कमरे में जाना था लेकिन अँधेरा ज्यादा था। उनको लग रहा था कि कही पर भूत छुपकर बैठा हुआ है। जैसे ही बाहर निकलेंगे, उन पर कूद पड़ेगा। उनकी बूढ़ी दाई ने उन्हें कहा- राम का नाम लो फिर तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा। फिर क्या था तबसे राम के साथ शुरू हुआ उनका रिश्ता मरते दम तक कायम रहा।
सरयू में बही थी अस्थि
1948 में गोली लगने के बाद गांधी ने आखिरी साँसे गिनते हुए भी हे राम कहा था। गांधी जी अपनी आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग में लिखते हैं कि बचपन में वो गुजरात में रामलीला देखते थे। हालांकि उन्होंने दिल्ली में कभी रामलीला देखा या नहीं, इसका प्रमाण नहीं मिलता है। अपने जीवनकाल में बापू दो बार रामलला का दर्शन करने अयोध्या गए। जब बापू की हत्या हो जाती है, उनकी अस्थियों को देश की नदियों में बहाया गया था। पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद उनकी अस्थियों को सरयू में बहाने भी ले गए थे।
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गांधी को श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने आज राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। बिना हथियार के भारत को स्वतंत्र कराने वाले गांधी को आज पूरी दुनिया श्रद्धांजलि दे रही है। गांधी का व्यक्तित्व ही था कि अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर ने कहा था कि महात्मा गांधी बीसवीं सदी के सबसे बड़े मनुष्य हैं। इसी तरह महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने गांधी को लेकर कहा था कि आने वाली पीढ़ियों को यकीन ही नहीं होगा कि हांड़ मांस का ऐसा आदमी भी कभी धरती पर था।



