नई दिल्ली: पंजाब, जिसे देश का फूड बास्केट कहा जाता है, बीते सात वर्षों में तीसरी बार बाढ़ (Punjab Flood 2025) की चपेट में आया है। केवल 10-15 दिन के भारी बारिश और नदियों के उफान ने राज्य के 2520 गांवों में तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा (Farmers Affected) से लगभग 400,000 किसान और मजदूर प्रभावित हुए हैं। करीब 10,000 कच्चे-पक्के घर क्षतिग्रस्त हुए और 25,000 लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। अब तक 58 लोगों की मौत हुई, 38 घायल और पांच लोग लापता हैं।
खेतों और फसलों की तबाही
बाढ़ के (Climate Change Impact) कारण लगभग 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हुआ, जिसमें 202,094 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन पर तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। हजारों बड़े जानवर और 35,000 पोल्ट्री पिंजरे नष्ट हो गए। पानी के उतरने के बाद खेतों में गाद और रेत के टीले दिखाई दे रहे हैं, जिससे रबी सीजन (Rabi Season) प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।
गुरुदारपुर के जैविक किसान तेजप्रताप सिंह कहते हैं, “जलवायु परिवर्तन और सरकारी कुप्रबंधन दोनों की मार किसान और मजदूरों पर ही पड़ रही है।” वहीं रावी नदी के किनारे हरदोवाल गांव में ज्योबनजीत सिंह ने बताया, “दलदल बन चुके खेतों में ट्रैक्टर काम नहीं कर सकता, केवल टैंक युक्त कंबाइन मशीन फसल काट सकती है।”
किसानों की आर्थिक मुश्किलें
ज्योबनजीत सिंह बताते हैं कि हर एकड़ खेत में 22,000 रुपये की लागत आई थी, लेकिन अब उसे साफ करने और फसल काटने में 28,000 रुपये प्रति एकड़ खर्च आएंगे। मुआवजे की घोषणा 20,000 रुपये प्रति एकड़ की हुई है, पर इसकी प्राप्ति अनिश्चित है। उन्होंने खेतों में जमा गाद उठाते हुए कहा, “यह दलदल रबी सीजन तक नहीं सूखेगा, गेहूं की बिजाई मुश्किल हो जाएगी।”
60 वर्षीय दरबीर कौर ने याद किया कि 25 अगस्त की रात अचानक सैलाब आया। “हमें घर की छतों पर भागना पड़ा और कोई चेतावनी नहीं मिली,” उन्होंने कहा।
पशुपालन और चारे की समस्या
किसानों के पास पशुओं के लिए चारा नहीं है। ज्योबनजीत सिंह ने बताया कि वे रिश्तेदारों से चारा लेकर अपने आठ जानवरों को जिंदा रख रहे हैं। उनका पूरा गांव बाढ़ की मार से तबाह हो चुका है।
रबी सीजन पर असर
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर के अनुसार, इस बार रबी सीजन में गेहूं की बिजाई में देरी होगी और उपज में भी भारी कमी आएगी। जिन किसान पहले धान और गेहूं के बीच सब्जी या अन्य फसल कर रहे थे, उनका नुकसान भी बढ़ गया है।
पंजाब की इस बाढ़ ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को तहस-नहस किया है, बल्कि राज्य के खाद्य सुरक्षा और रबी सीजन को भी संकट में डाल दिया है। सरकार और समाज की त्वरित मदद ही इन प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए राहत का रास्ता बन सकती है।



