नई दिल्ली/लेह: केंद्र सरकार ने लद्दाख में बुधवार को हुई हिंसा के लिए सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्रालय ने देर रात बयान जारी कर कहा कि सोनम वांगचुक ने भड़काऊ बयानों से भीड़ को उकसाया। हिंसा के बीच उन्होंने अपना उपवास तोड़ा, लेकिन हालात काबू करने के प्रयास की जगह एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए। मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक कई नेताओं ने वांगचुक से हड़ताल खत्म करने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने इसे जारी रखा। उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ शैली और नेपाल-बांग्लादेश के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करके लोगों को गुमराह किया।
हिंसा में 4 लोगों की मौत, 80 घायल
लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर पांच से जारी आंदोलन बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसमें करीब 30 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। भाजपा कार्यालय और सीआरपीएफ की गाड़ी में आग लगाने के बाद प्रशासन ने लेह में कर्फ्यू लगा दिया है।
📢 लद्दाख पर प्रेस विज्ञप्ति
— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) September 24, 2025
⭐ श्री सोनम वांगचुक द्वारा 10-09-2025 को छठी अनुसूची और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की गई थी। यह सर्वविदित है कि भारत सरकार इन्हीं मुद्दों पर Apex Body Leh और Kargil Democratic Alliance के साथ सक्रिय रूप से बातचीत…
लेह में कर्फ्यू और सुरक्षा बलों की तैनाती
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया है। हालात काबू में लाने के लिए ITBP, CRPF और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। लेह और उसके आसपास के सभी इलाकों में दूसरे दिन भी आवाजाही पर रोक रही। यह घटना बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि लेह में 36 साल बाद हिंसा हुई है। इससे पहले 27 अगस्त, 1989 को जब लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था, तब पुलिस फायरिंग में तीन नागरिक मारे गए थे।
विदेशी कनेक्शन की आशंका
सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार ने हिंसा के पीछे विदेशी कनेक्शन की आशंका जताई है। खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं और वांगचुक भी निशाने पर हैं। जानकारी के मुताबिक इसी साल फरवरी वांगचुक इस्लामाबाद गए थे, जहां ‘ब्रीथ पाकिस्तान’ क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। एक वीडियो में वे कहते नजर आ रहे हैं, मैं पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हूं। यहां डॉन मीडिया द्वारा आयोजित क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आया हूं।
वांगचुक ने जारी किया वीडियो संदेश
सोनम वांगचुक ने बुधवार को वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह लद्दाख और मेरे लिए सबसे दुखद दिन है। हम पिछले पांच सालों से शांति के रास्ते पर चल रहे हैं। हमने पांच बार भूख हड़ताल की और लेह से दिल्ली तक पैदल चले, लेकिन आज हम हिंसा के कारण शांति के अपने संदेश को विफल होते देख रहे हैं। उन्होंने युवाओं की मौत पर दुख जताते हुए अनशन तुरंत समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वो सरकार से कहना चाहते हैं कि वह हमारे शांति के संदेश को सुने। जब शांति की अनदेखी की जाती है, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है।
हिंसा कैसे भड़की? दो मुख्य कारण
- सोशल मीडिया से भीड़ जुटाई: आंदोलनकारियों ने 23 सितंबर की रात 24 को लद्दाख बंद का आह्वान किया। सोशल मीडिया पर लेह हिल काउंसिल पहुंचने की अपील की गई, जिसका असर दिखा और बड़ी संख्या में लोग जुट गए।
- पुलिस-प्रदर्शनकारियों की झड़प: लेह हिल काउंसिल के सामने बैरिकेड्स लगे थे। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। जवाब में भीड़ ने पुलिस गाड़ियां जलाईं और तोड़फोड़ की। सुरक्षाबलों को आत्मरक्षा में गोलीबारी करनी पड़ी।
36 साल बाद लद्दाख में हिंसा
यह घटना 1989 के बाद लद्दाख में पहली बड़ी हिंसा है। 27 अगस्त, 1989 को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में तीन लोग मारे गए थे। अब प्रशासन ने शांति बहाल करने के लिए आईटीबीपी, पुलिस और सीआरपीएफ के हजारों जवान तैनात किए हैं। लेह और आसपास के इलाकों में सड़कें सील हैं, और 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
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आर्टिकल 370 हटने के बाद आंदोलन
2019 में आर्टिकल 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बने। लद्दाख के लोग खुद को राजनीतिक रूप से वंचित महसूस करने लगे। वे पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत जमीन-नौकरियों की सुरक्षा, अलग पब्लिक सर्विस कमीशन और संसद में दो सीटें मांग रहे हैं। सरकार ने हाई-पावर्ड कमिटी के जरिए बातचीत की है, लेकिन ब्रेकथ्रू नहीं हुआ। अगस्त 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने 5 नए जिले (जांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा, चांगथांग) बनाने की घोषणा की, जिससे जिलों की संख्या 7 हो गई। यह विकास के लिए कदम था, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनकी मुख्य मांगों का समाधान नहीं।



