नई दिल्ली: एशिया कप (Asia Cup 2025) के सुपर-4 मुकाबले में भारत ने रविवार को पाकिस्तान (India vs Pakistan) को सात विकेट से मात दी। कभी क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता कही जाने वाली यह भिड़ंत अब धीरे-धीरे अपनी चमक खोती जा रही है।
कभी ‘एल क्लासिको’ से बड़ी मानी जाती थी जंग
एक दौर था जब भारत-पाकिस्तान (India vs Pakistan Match) मैच सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि भावनाओं और जुनून की लड़ाई माना जाता था। 1980 और 1990 के दशक में द्विपक्षीय सीरीज के दौरान स्टेडियम में ऐसा माहौल होता था, मानो हर गेंद पर किसी का दिल धड़क रहा हो। शारजाह से लेकर विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी तक, यह मुकाबला पूरे क्रिकेट जगत की धड़कन बढ़ा देता था।
अब एकतरफा हो चुकी है जंग
पिछले कुछ सालों में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। भारत ने पाकिस्तान (India vs Pakistan) पर पूरी तरह दबदबा बना लिया है। 2022 से दोनों टीमों के बीच खेले गए सात मैचों में भारत ने सभी में जीत दर्ज की है। कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने भी कहा कि असली प्रतिद्वंद्विता तब होती है जब दोनों टीमें बराबरी की टक्कर दें, लेकिन फिलहाल स्कोरलाइन 13-0 जैसी हो चुकी है।
नई पीढ़ी ने संभाली जिम्मेदारी
भारत की सफलता का कारण सिर्फ पुराने दिग्गज नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की जिम्मेदारी भी है। शुभमन गिल (Shubman Gill), अभिषेक शर्मा और ऋषभ पंत जैसे बल्लेबाज लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव का जलवा पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेल देता है।
पाकिस्तान की टीम में अस्थिरता
इसके उलट पाकिस्तान क्रिकेट टीम (Pakistan Cricket Team) अंदरूनी विवादों और गुटबाजी से जूझ रही है। पीसीबी में बार-बार बदलाव, कप्तानी की अस्थिरता और खिलाड़ियों की फिटनेस की समस्याओं ने टीम का मनोबल तोड़ दिया है। नतीजा यह रहा कि 2024 टी-20 विश्व कप में अमेरिका और आयरलैंड जैसी टीमें पाकिस्तान को हरा चुकी हैं।
मैदान से बाहर भी विवाद
एशिया कप के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का रवैया भी विवादों में रहा। टॉस के बाद भारतीय खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने की घटना हो या रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट को हटाने की जिद—पीसीबी का आचरण आलोचना का विषय बना। टीम मैच के लिए देर से पहुंची और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक रद्द कर दी गई। आईसीसी ने इन घटनाओं पर नाराजगी भी जताई।
खेलभावना से परे व्यवहार
मैदान पर भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों का रवैया खेलभावना के खिलाफ रहा। फरहान साहिबजादा ने अर्धशतक के बाद बल्ले को बंदूक की तरह चलाकर इशारा किया, जबकि हारिस राउफ ने बाउंड्री लाइन पर जेट गिराने का संकेत दिया। इसके बावजूद एसीसी ने कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उसके अध्यक्ष मोहसिन नकवी खुद पीसीबी प्रमुख भी हैं।
मीडिया से भेदभाव
भारतीय पत्रकारों के साथ भी पाकिस्तान का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा। पाकिस्तानी मीडिया मैनेजर लगातार भारतीय पत्रकारों के सवालों से बचते रहे, जबकि भारतीय मैनेजर ने पाकिस्तानी पत्रकारों को खुलकर अवसर दिया। इस पर आईसीसी पहले ही जांच कर रही है।
भारत और पाकिस्तान के बीच कभी ‘हाई वोल्टेज’ माने जाने वाले मुकाबले अब रोमांच खोते जा रहे हैं। भारतीय टीम की निरंतरता और पाकिस्तान की अस्थिरता ने इस प्रतिद्वंद्विता को एकतरफा बना दिया है।



