लद्दाख की दुर्गम घाटियों में कनेक्टिविटी स्थापित करने वाली सीमा सड़क संगठन (BRO) की परियोजना विजयक ने 21 सितंबर, 2025 को कारगिल में अपना 15वां स्थापना दिवस मनाया। 1,400 किलोमीटर से अधिक सड़क और 80 से ज्यादा प्रमुख पुलों का निर्माण करने के अलावा अप्रैल 2025 में सर्दियों के बंद होने के बाद केवल 31 दिनों के भीतर ज़ोजिला दर्रे को फिर से खोलना भी परियोजना विजयक की उपलब्धियों में शामिल है।
इसने 16वें वर्ष में प्रवेश करते हुए 1,200 करोड़ रुपये से अधिक लागत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शुरू किया है। जिसमें सड़कों का चौड़ीकरण, नई सुरंगों एवं पुलों का निर्माण, और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण पद्धतियों जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का समावेश शामिल है। ये प्रयास लद्दाख की ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में लचीलापन, स्थायित्व व निर्बाध कनेक्टिविटी को और अधिक बेहतर बनाएंगे।
क्या है प्रोजेक्ट विजयक?
प्रोजेक्ट विजयक सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक परियोजना है, जो लद्दाख और आसपास के चुनौतीपूर्ण इलाकों में महत्वपूर्ण सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव करती है। यह परियोजना 2010 में स्थापित की गई थी, पिछले 15 वर्षों में इस परियोजना ने 1,400 किलोमीटर से अधिक सड़कों और 80 से अधिक पुलों का निर्माण किया है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क और सुलभता बढ़ी है।
अगर उपलब्धियों की बात करें तो अप्रैल 2025 में, जोज़िला दर्रे को खोलना, ठंडे तापमान में सड़क निर्माण को सुगम बनाने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने वाली Rejupave तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण इस संगठन की बड़ी उपलब्धि हैं।
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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ)
भारतीय सेना का एक अंग है जो रक्षा मंत्रालय के तहत भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और मित्र पड़ोसी देशों में सड़कों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। इसकी स्थापना 7 मई 1960 को हुई थी। यह रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।




