बिहार विधानसभा के दूसरे चुनाव से कम होती गयी कांग्रेस की सीटें

बिहार विधानसभा के चौथे चुनाव में कांग्रेस पहली बार अल्पमत में आ गई। इसके बाद ऊपर-नीचे होती रही। बिहार की राजनीति पर वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नाथ राय की रिपोर्ट

Share This Article:

पटना: बिहार की राजनीति में आजादी के बाद तीन विधानसभा चुनावों तक बहुमत कांग्रेस के पास रहा। इसके बाद उठापटक का जो दौर शुरू हुआ, कांग्रेस कभी उससे उबर नहीं पाई। हालांकि 1990 तक पार्टी राज्य में कांग्रेस बिहार में अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए उठापटक करती रही। सीटों के गणित में भी आगे-पीछे होती रही, लेकिन लालू प्रसाद ने 1990 के बाद कांग्रेस का गणित ध्वस्त कर दिया। इसके बाद पार्टी सिर्फ दूसरों की बैसाखी बनती रही। खुद अगुवाई करने में अक्षम साबित होती रही।
आजादी के बाद के 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 318 में से 239 सीटों पर जीत हासिल की। झारखंड पार्टी को 32 सीटें मिलीं। 1957 में हुए दूसरे चुनाव में कांग्रेस की 29 सीटें कम हो गईं और वह 210 पर आ गई। तीसरे विधानसभा चुनाव में 1957 की तुलना में पार्टी की 25 सीटें कम हो गईं और वह 185 सीटों पर पहुंच गई। हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 159 सीटों से अभी ज्यादा थी। इस चुनाव में स्वतंत्र पार्टी ने 50 सीटों पर जीत हासिल कर प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में आ गई।
राज्य के चौथे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। 21 फरवरी 1967 को हुए चुनाव में पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले 57 सीटें कम मिलीं और यह संख्या 128 पर सिमट गई। पार्टी बहुमत के लिए 160 सीटों से बहुत पीछे रह गई।
सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, सीपीआई, जन क्रांति दल, प्रजा सोशलिस्ट जैसी पार्टियों ने मिलकर जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में सरकार का गठन किया। इस चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी थी और उसके नेता कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री के दावेदार थे, लेकिन अन्य दल उनके नाम पर सहमत नहीं हुए। हालांकि यह सरकार एक साल भी नहीं चल पाई और कांग्रेस ने फूट डालने की नीति पर चलकर उसे सत्ता छोडने को मजबूर कर दिया।

सिर्फ पांच दिन के लिए सीएम बने सतीश प्रसाद

इसके बाद गठित हुई नई सरकार में सिर्फ पांच दिन के लिए सतीश प्रसाद सिंह मुख्यमंत्री बने। इसी बीच कांग्रेस से हाथ मिलाकर बीपी मंडल के नेतृत्व में सरकार बनी। मंडल भी 50 दिन तक कुर्सी पर रहे। इसके बाद कांग्रेस के भीतर ही बगावत हो गई और भोला पासवान शास्त्री पहले दलित मुख्यमंत्री बने। इनका मंत्रिमंडल चार माह तक चला। भोला का कार्यकाल 100 दिन रहा, इसके बाद कांग्रेस की केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया, जो 242 दिन तक रहा।

1969 में भी कांग्रेस को हासिल नहीं हुआ बहुमत

फरवरी 1969 राज्य के पांचवें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर बहुमत से दूर रही। उसे 118 सीटें ही हासिल हुईं। विपक्ष की ओर से हरिहर सिंह मुख्यमंत्री बने, जो 117 दिन तक ही पद पर रह सके। इसके बाद भोला सिंह 13 दिन के लिए सीएम बने। बाद में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया, जो 16 फरवरी 1970 तक 225 दिन रहा। राष्ट्रपति शासन के दौरान ही कांग्रेस दो हिस्सो में बंट गई। 50 विधायक कांग्रेस ओ के पाले में गए, तो कांग्रेस आर के साथ 60 विधायक रहे।

दरोगा राय द्वारा गठित मुंगेरी लाल आयोग ने की थी ओबीसी आरक्षण की सिफारिश

कांग्रेस आर के दरोगा प्रसाद राय पीएसपी, सीपीआई, हुल झारखंड, शोषित दल के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। उन्होंने ही मुंगेरीलाल आयोग का गठन किया था, जिसने बाद में ओबीसी आरक्षण की सिफारिश की। उनके मंत्रिमंडल में पिछड़ी जातियों का दबदबा था। लेकिन शोषित दल के विद्रोह के कारण 10 माह बाद ही यह सरकार गिर गई। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर ने छह माह तक सीएम की कुर्सी संभाली, फिर भोला पासवान 222 दिन तक मुख्यमंत्री बने। फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया और यह 70 दिन तक रहा।

1972 में कांग्रेस ने फिर हासिल किया बहुमत

मार्च 1972 में राज्य में हुए छठवें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटों में उछाल आया और वह 167 पर पहुंच गई। इसके बाद जन आंदोलन का दौर शुरू हुआ और 1977 में हुए चुनाव में पिछली बार की तुलना में कांग्रेस की 110 सीटें कम हो गई और वह 57 पर सिमट गई। फिर 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 169 सीटों पर जीत हासिल की। 1985 के चुनाव में पार्टी 196 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही। इसके बाद 1990 में हुए चुनाव में कांग्रेस 71 सीटों पर सिमट गई। उसके बाद से आज तक पार्टी का कोई नेता राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.