नई दिल्ली: चारों तरफ से घिर चुके माओवादियों ने एक बार फिर सीजफायर की घोषणा कर सरकार से बातचीत का प्रस्ताव दिया है। 17 सितंबर को सुर्खियों में आया माओवादियों की यह घोषणा 15 अगस्त की ही है। उसी दिन भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने पत्र जारी किया था। क्रांतिकारी अभिवादन के साथ समाप्त किया गया यह पत्र माओवादियों द्वारा जिसको वायरल करने के लिए दिया गया था, वह एक माह से अपना मोबाइल बंद कर दिया, जिसे 16 सितंबर को खोलकर देखने के बाद इसका मीडिया और सरकार को पता चला।
इस माओवादियों की प्रेस विज्ञप्ति में शीर्षक दिया गया है कि भारत की उत्पीड़ित जनता की समस्याओं का निराकरण के लिए जन संघर्षों में भाग बनेंगे। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेतागण को संबोधित पत्र में कहा गया है कि हम मार्च 2025 के आखिरी सप्ताह से सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए गंभीर एवं ईमानदारी के साथ शांति वार्ता के लिए प्रयास कर रहे हैं। हमारी पार्टी ने 10 मई को अभय के माध्यम से महासचिव का एक बयान जारी किया था। उस समय हमारी पार्टी ने सरकार से एक माह के लिए सीज फायर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी सानुकूल रूख को जाहिर नहीं किया था। बल्कि और अपने सैनिक हमलों को तेज कर दिये हैं।
21 मई को माड के गुंडुकोट के पास हुए हमले में केंद्रीय कमेटी के कामरेट बसवाराजू के साथ ही 28 माओवादी मारे गये। इस पत्र में आगे लिखा है कि हम बदले हुए परिस्थिति में हथियार छोड़ने का निर्णय लिये हैं। यह अस्थायी तौर पर संघर्ष विराम का निर्णय लिया गया है। भविष्य में हम जन समस्याओं पर तमाम राजनीतिक पार्टियां एवं संघर्षरत संस्थाओं से जहां तक संभव हो कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे।
इस संघर्ष विराम के लिए माओवादियों ने एक माह का समय मांगा है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सरकार को एक माह तक संघर्ष विराम की घोषणा करनी होगी। उन्होंने कहा है कि हमें इसके लिए जेल में बंद अपने साथियों, विभिन्न राज्यों में काम कर रहे माओवादियों से उनके सहमति और असहमति पर राय मांगनी होगी। उन्होंने इसके लिए अपना ईमेल और फेसबुक एकाउंट भी जारी किया है। इसके साथ ही लिखा है कि इसको सभी चैनलों के माध्यम से प्रसारित किया जाय, जिससे माओवादी विचारक अपनी राय दे सकें।



