नई दिल्ली: अगले कुछ महीनों में दिल्ली सेंसर युक्त लैस स्मार्ट स्ट्रीट से जगमगाएगी, जो मौसम की रंगत के आधार पर जलेंगी और बुझेंगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पुरानी पीली सोडियम वेपर स्ट्रीट लाइटों को हटाकर टाइमर-युक्त स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाने का फैसला किया है। इनमें 50 हजार एलईडी और 40 हजार सोडियम स्ट्रीट लाइट्स है। वर्तमान में इन स्ट्रीट लाइट्स का संचालन पुरानी तकनीक से हो रहा है। इससे बिजली खपत अधिक होती है। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि यह पहल न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी बल्कि ऊर्जा बचत और नागरिक सहभागिता के नए अवसर भी खोलेगी।
वर्तमान स्ट्रीट लाइट्स HPSV (हाई प्रेशर सोडियम वेपर) फिटिंग हैं
पिछले कई दशकों से स्ट्रीट लाइट परियोजनाएँ पारंपरिक मॉडल पर चलती थीं, जहाँ सरकार ठेकेदारों को अग्रिम भुगतान करती थी। इससे अक्सर काम में देरी, खराब रखरखाव और जवाबदेही की कमी देखने को मिलती थी। लेकिन इस बार दिल्ली पीडब्ल्यूडी ने मंत्री परवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में ईएमआई आधारित मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के तहत ठेका लेने वाली निजी कंपनी को मासिक भुगतान तभी मिलेगा जब लाइटें पूरी तरह चालू होंगी और उनका रखरखाव समय पर किया जाएगा।
फिलहाल पीडब्ल्यूडी के अधीन लगभग 96,000 स्ट्रीट लाइट्स हैं, जिनमें से करीब 45,000 अब भी पारंपरिक HPSV फिटिंग्स पर चल रही हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट एलईडी लाइट्स से बदला जाएगा। इससे न केवल सड़कों पर बेहतर रोशनी मिलेगी बल्कि बिजली की खपत भी कम होगी और लाइट्स की आयु बढ़ेगी।
स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स से साल करीब ₹31.53 करोड़ की बचत होगी
इस पहल का एक और बड़ा लाभ है भारी बचत। पारंपरिक HPSV फिटिंग्स को एलईडी लाइट्स से बदलने भर से दिल्ली सरकार को हर साल करीब ₹31.53 करोड़ की बचत होगी। यह रकम सीधे तौर पर करदाताओं के हित में जाएगी और इसे अन्य विकास कार्यों व जनकल्याण योजनाओं पर खर्च किया जा सकेगा। इस परियोजना की सबसे खास बात है इसका तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम। हर स्मार्ट लाइट एक मोबाइल ऐप , केंद्रीकृत डैशबोर्ड और कंट्रोल रूम से जुड़ी होगी। इससे अधिकारी वास्तविक समय में लाइट्स की स्थिति देख सकेंगे, खराबी तुरंत पकड़ सकेंगे और मरम्मत सुनिश्चित कर सकेंगे। पहली बार यह मोबाइल ऐप सार्वजनिक तौर पर भी उपलब्ध होगा ताकि नागरिक अपनी गली या इलाके की लाइट्स की स्थिति देख सकें और शिकायत दर्ज करा सकें। इसके साथ ही, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य होगा। यानी नागरिक द्वारा दर्ज किसी भी खराब लाइट की शिकायत तय समयसीमा में ठीक करनी होगी। इससे जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और सेवा वितरण की गुणवत्ता सुधरेगी।
पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह ने कहा
दिल्ली की सड़कें हमारी राजधानी की रीढ़ हैं। स्मार्ट एलईडी स्ट्रीट लाइट्स के साथ हम सिर्फ फिटिंग नहीं बदल रहे हैं, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली बदल रहे हैं। ईएमआई मॉडल कंपनियों को जिम्मेदार बनाएगा और उन्हें भी जवाबदेही का साझीदार बनाएगा। पहली बार नागरिक खुद इस व्यवस्था को वास्तविक समय में देख सकेंगे, मॉनिटर कर सकेंगे और सवाल भी पूछ सकेंगे। यही असली पारदर्शिता है।
पहले काम, फिर परफॉर्मेंस का सबूत बाद में भुगतान
पहले सरकार पैसे पहले खर्च करती थी और जनता को नतीजों के लिए इंतजार करना पड़ता था। अब प्रणाली बिल्कुल उलटी होगी पहले काम, फिर परफॉर्मेंस का सबूत और तभी भुगतान। इससे सुनिश्चित होगा कि जनता के टैक्स का पैसा ईमानदारी और दक्षता से खर्च हो। अब 96,000 में से हर एक स्ट्रीट लाइट स्मार्ट, कनेक्टेड और जवाबदेह होगी। सबसे अहम बात यह है कि हर नागरिक के पास यह देखने का अधिकार होगा कि सिस्टम काम कर रहा है या नहीं।”
सरकार नए राजस्व मॉडल भी तलाश रही
बेहतर रोशनी और जवाबदेही के साथ सरकार नए राजस्व मॉडल भी तलाश रही है। एक प्रस्ताव पर विचार चल रहा है जिसके तहत स्ट्रीट लाइट पोल्स पर विज्ञापन की अनुमति दी जा सकती है। इससे न केवल सरकार की आमदनी बढ़ेगी बल्कि अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी कम होगा, साथ ही शहरी सौंदर्य भी बरकरार रहेगा। पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि यह पहल न सिर्फ ऊर्जा बचाएगी और कार्बन उत्सर्जन कम करेगी बल्कि दिल्ली की सड़कों पर यातायात, सुरक्षा और रात्रिकालीन जीवन की सुविधा को भी बेहतर बनाएगी। नवाचार, जवाबदेही, ऊर्जा दक्षता और नागरिक सशक्तिकरण का संगम बनकर यह परियोजना शहरी शासन में ऐतिहासिक छलांग का प्रतीक बनेगी। बहुत जल्द दिल्ली की सड़कें और ज्यादा रोशन, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा स्मार्ट होंगी, और यह पहल देशभर के लिए सार्वजनिक अवसंरचना में तकनीक के इस्तेमाल का नया मानक स्थापित करेगी।



