नई दिल्ली: लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने 11वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) भारत क्षेत्र सम्मेलन में सदनों में नियोजित गतिरोध पर चिंता जताई। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। कहा, सभी विधानमंडल अपनी कार्यवाही और चर्चा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानक स्थापित करें। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि सदन में तथ्यपरक, सारगर्भित चर्चा करने वाले जनप्रतिनिधियों के दृष्टिकोण को प्रमुखता से दिखाएं ताकि सदस्यों के बीच स्वस्थ संवाद के लिए प्रतिस्पर्धा हो।
कर्नाटक विधानमंडल की मेजबानी में 11 से 13 सितंबर तक बंगलुरू में चले इस तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में बिरला ने कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में विधानमंडल नियोजित गतिरोध के बिना कार्य कर सकें।
भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मार्गदर्शक
लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अध्यक्ष भी की। उन्होंने कहा कि वैचारिक या राजनैतिक मतभेदों के आधार पर सदन रोकने के स्थान पर हमारा संकल्प सदन चलाने का होना चाहिए। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत के लोकतंत्र और जीवंत संविधान को दुनिया के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक प्रणाली हमारे विधायी तंत्र को आज भी प्रेरणा और मार्गदर्शन देती है। उन्होंने सदन में कार्य व चर्चाओं की अवधि तथा सत्रों में बैठकों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।
चार संकल्प लिए
-लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए सदनों के अंदर गतिरोध और व्यवधान को समाप्त किए जाने
-संसद के सहयोग से राज्यों की विधायी संस्थाओं की अनुसंधान (Research) और सन्दर्भ (Reference) शाखाओं को मजबूत करने
-विधायी संस्थाओं में डिजिटल टेक्नोलॉजी का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करने
-लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर सर्वसम्मति से संकल्प अंगीकृत किए गए।
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भूमिका व्यापक हुई
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के समय में संसद और विधानसभाओं की भूमिका और भी व्यापक हो गई है। साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अधिकार और संवैधानिक सुधार जैसे विषय अब हमारी चर्चाओं के नए केंद्र बन रहे हैं। इन जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए समिति आधारित विचार-विमर्श, विशेषज्ञों से संवाद और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है। बिरला ने कहा कि हमें युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को नेतृत्व के अवसर देने होंगे, जिससे संवाद समावेशी बने और समाज का हर वर्ग अपने विचार और अनुभव साझा कर सके।
जनता को महसूस कराने पर जोर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि जनता महसूस करे कि विधानमंडल उनकी आवाज का सशक्त मंच है न कि केवल राजनीतिक टकराव का स्थान। वैचारिक या राजनैतिक मतभेदों के आधार पर सदन रोकने के स्थान पर हमारा संकल्प सदन चलाने का होना चाहिए। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय विधायी संस्थाओं में संवाद और चर्चा-जन विश्वास का आधार, जन आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम“ था। इसमें 26 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से 45 पीठासीन अधिकारी शामिल हुए, जिनमें 22 विधानसभा अध्यक्ष, 16 उपाध्यक्ष, 4 सभापति और 3 उपसभापति थे।



