आईजोल: पीएम मोदी ने मिजोरम की राजधानी को पहली बार भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली 8,070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन का उद्घाटन किया। 45 सुरंगें और 143 पुल और भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल इस परियोजना का हिस्सा है। इसके चालू हो जाने से मिज़ोरम और देश के बाकी हिस्सों के लोगों को सुरक्षित, कुशल और किफायती यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे खाद्यान्न, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे समग्र रसद तक पहुंच और क्षेत्रीय सुगम्यता में वृद्धि होगी।
पीएम मोदी ने तीन नई एक्सप्रेस ट्रेन को रवाना किया
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों, सैरांग (आइजोल)-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) राजधानी एक्सप्रेस, सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। आइजोल अब राजधानी एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली से सीधा जुड़ जाएगा। सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस मिजोरम और असम के बीच आवाजाही को सुगम बनाएगी। सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस मिजोरम को कोलकाता से सीधे जोड़ेगी। इस बेहतर कनेक्टिविटी से अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और बाजारों तक पहुंच बेहतर होगी। इससे पूरे क्षेत्र में शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्र में पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
सड़क परियोजनाओं की नींव रखी
रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने कई सड़क परियोजनाओं की नींव रखी। इनमें आइजोल बाईपास रोड, थेनज़ोल-सियालसुक रोड और खानकाउन-रोंगूरा रोड शामिल हैं। प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (पीएम-डिवाइन) योजना के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 45 किलोमीटर लंबी आइजोल बाईपास सड़क का उद्देश्य आइजोल शहर को भीड़भाड़ से मुक्त करना, लुंगलेई, सियाहा, लॉन्ग्टलाई, लेंगपुई हवाई अड्डे और सैरांग रेलवे स्टेशन आदि से संपर्क में सुधार करना है। इससे दक्षिणी जिलों से आइजोल तक यात्रा का समय लगभग 1.5 घंटे कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ होगा। पूर्वोत्तर विशेष अवसंरचना विकास योजना एनईएसआईडीएस (सड़क) के तहत थेनजोल-सियालसुक रोड से कई बागवानी किसानों, ड्रैगन फल उत्पादकों, धान की खेती करने वालों और अदरक प्रसंस्करणकर्ताओं को लाभ होगा, साथ ही आइजोल-थेनजोल-लुंगलेई राजमार्ग के साथ संपर्क मजबूत होगा।
पीएम मोदी का वीडियो कांफ्रेंस से संबोधन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने नीले पहाड़ों की इस खूबसूरत धरती के संरक्षक, परम पूज्य भगवान पाथियन को नमन किया। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि वे मिजोरम के लेंगपुई हवाई अड्डे पर मौजूद हैं और मौसम खराब होने के कारण आइजोल में लोगों से नहीं मिल सके। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद वे इस माध्यम से भी लोगों के प्यार और स्नेह को महसूस कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि चाहे स्वतंत्रता आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण, मिजोरम के लोग योगदान देने के लिए हमेशा आगे आए हैं। लालनु रोपुइलियानी और पासल्था खुआंगचेरा जैसी विभूतियों के आदर्श राष्ट्र को प्रेरित करते रहते हैं। त्याग और सेवा, साहस और करुणा, मिज़ो समाज में गहराई से समाहित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज, मिजोरम भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।”
इस दिन को देश, विशेषकर मिजोरम के लोगों के लिए ऐतिहासिक बताते हुए, मोदी ने कहा, “आज से आइजोल भारत के रेलवे मानचित्र पर होगा।” अतीत को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ वर्ष पहले उन्हें आइजोल रेलवे लाइन की नींव रखने का अवसर मिला था। उन्होंने इस रेलवे लाइन को देश को समर्पित किया। पीएम ने इस बात पर भी जोर दिया कि दुर्गम क्षेत्र सहित कई चुनौतियों के बावजूद बैराबी-सैरांग रेल लाइन अब एक वास्तविकता बन गई है। उन्होंने इंजीनियरों के कौशल और श्रमिकों की भावना की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है।
प्रधानमंत्री कहा कि लोग और देश हमेशा मन से सीधे जुड़े रहे हैं। पहली बार, मिज़ोरम का सैरांग राजधानी एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली से सीधे जुड़ेगा। यह सिर्फ एक रेल संपर्क नहीं है, बल्कि परिवर्तन की जीवन रेखा है और यह मिज़ोरम के लोगों के जीवन और आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मिजोरम के किसान और व्यवसाय अब देश भर के अधिक बाजारों तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। इस विकास से पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
विपक्ष पर निशाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से देश में कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान ज़्यादा वोट और सीटें पाने वाले क्षेत्रों पर रहा। परिणामस्वरूप, मिजोरम जैसे राज्यों सहित पूरे पूर्वोत्तर को इस रवैये से भारी नुकसान उठाना पड़ा। पीएम ने जोर देकर कहा कि वर्तमान दृष्टिकोण बहुत अलग है और जो लोग पहले उपेक्षित थे, वे अब सबसे आगे हैं। जो लोग कभी हाशिए पर थे, वे अब मुख्यधारा का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से सरकार पूर्वोत्तर के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। यह क्षेत्र देश का विकास इंजन बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर के कई राज्य पहली बार भारत के रेल मानचित्र पर शामिल हुए हैं। भारत सरकार ने सभी प्रकार की कनेक्टिविटी- ग्रामीण सड़कें और राजमार्ग, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन, बिजली, नल से जल और एलपीजी कनेक्शन को मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मिजोरम को हवाई यात्रा के लिए उड़ान योजना का भी लाभ मिलेगा और बताया कि इस क्षेत्र में जल्द ही हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू होंगी। श्री मोदी ने कहा कि इससे मिजोरम के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच में काफी सुधार होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, “एक्ट ईस्ट नीति और उभरते उत्तर-पूर्व आर्थिक गलियारे, दोनों में मिज़ोरम की प्रमुख भूमिका है।” उन्होंने कहा कि कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और सैरांग-ह्मांगबुचुआ रेल लाइन से मिजोरम दक्षिण-पूर्व एशिया के माध्यम से बंगाल की खाड़ी से जुड़ जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस कनेक्टिविटी से उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश तेजी से वैश्विक खेलों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे देश में खेल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि मिजोरम में खेलों की समृद्ध परंपरा रही है और मिजोरम ने फ़ुटबॉल व अन्य खेलों में कई चैंपियन दिए हैं। मिजोरम को सरकार की खेल नीतियों का भरपूर लाभ मिल रहा है। खेलो इंडिया योजना के तहत आधुनिक खेल ढांचों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने हाल ही में एक राष्ट्रीय खेल नीति – खेलो इंडिया खेल नीति – शुरू की है। उन्होंने कहा कि यह पहल मिज़ोरम के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी।
प्रधानमंत्री ने देश और विदेश में पूर्वोत्तर की खूबसूरत संस्कृति के राजदूत की भूमिका निभाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पूर्वोत्तर की क्षमता को प्रदर्शित करने वाले मंचों को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। कुछ महीने पहले दिल्ली में आयोजित अष्ट लक्ष्मी महोत्सव में अपनी भागीदारी को याद करते हुए, मोदी ने कहा कि इस महोत्सव में पूर्वोत्तर के वस्त्र, शिल्प, जीआई-टैग उत्पादों और पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित किया गया। राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने निवेशकों को इस क्षेत्र की विशाल क्षमता का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि यह समिट बड़े पैमाने पर निवेश और परियोजनाओं को आकर्षित कर रहा है। श्री मोदी ने आगे कहा कि वोकल फॉर लोकल पहल से पूर्वोत्तर के कारीगरों और किसानों को बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मिजोरम के बांस उत्पाद, ऑर्गेनिक अदरक, हल्दी और केले प्रसिद्ध हैं।
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30 टीएमटीपीए क्षमता वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की नींव रखी
क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री ने आइज़ोल के मुआलखांग में 30 टीएमटीपीए (हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमता वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की नींव रखी। इसका उद्देश्य मिज़ोरम और पड़ोसी राज्यों में एलपीजी की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना और स्वच्छ रसोई ईंधन तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



