काठमांडू(नेपाल): नेपाल इस समय भारी राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश भर में हो रहे भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बीच इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन इस आन्दोलन ने उग्र रूप ले लिया हैं बीते दिन(9 सितम्बर)को प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों पर आगजनी की जिसमे नेपाल के पूर्व पीएम की पत्नी की जान चली गई। यह विरोध-प्रदर्शन Gen Z द्वारा संचालित सबसे बड़े युवा आंदोलन में बदल चुका है।
प्रदर्शनकारियों ने आवास पर लगाई आग
देश की राजधानी काठमांडू में हिंसा भड़कने के बाद प्रदर्शनकार्यो ने पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर पर अपना गुस्सा निकाला। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास पर तोड़फोड़ मचा दी इसी दौरान विरोध कर रहे कुछ लोगो ने नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल की पत्नी राजलक्ष्मी पेंटर के साथ बुरी तरह से मारपीट कर उन्हें खून से लतपत कर दिया और साथ ही उनके घर में आग लगा दी। इस आग में राजलक्ष्मी गंभीर रूप से घायल हो गई और कीर्तिपुर बर्न अस्पताल में ICU में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पार्टी के नेता नरेश साही नेबताया कि घटना के वक्त राजलक्ष्मी अपने बेटे निर्भीक खनल के साथ आवास पर मौजूद थी। इस दौरान प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे और उन पर हमला बोल दिया। हालांकि नेपाल की सेना ने हमला होने से पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल को घर से निकाल कर उन्हें बचा लिया था लेकिन इस घटना में उनकी पत्नी प्रदर्शनकारियो के गुस्से का शिकार हो गई और हादसे में उनकी मौत हो गई।
संसद भवन और सरकारी दफ्तरों में आगजनी
PM ओली के इस्तीफ़े के बाद काठमांडू और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने अपना आपा खो दिया और संसद समेत कई सरकारी दफ्तरों और शीर्ष नेताओ के घर पर आग लगा दी। जिसमे प्रदर्शनकारियो ने निम्नलिखित चीजो को नुकसान पहुंचाया:
- संसद भवन में तोड़फोड़ और आगजनी
- देश के सुप्रीम कोर्ट को भी आग के हवाले किया
- नेपाली कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में आग
- पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के घर पर हमला
- प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के घर पर भी आगजनी
- कई अन्य मंत्रियों के घरों और सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़
यह प्रदर्शन नेपाल के इतिहास का अब तक का सबसे हिंसक प्रदर्शनों में से एक बन चुका है।
Gen Z आंदोलन की बड़ी भूमिका
इस आंदोलन की सबसे अहम बात यह है कि इसे Gen Z यानी 18 से 25 साल के युवाओं ने सोशल मीडिया के जरिए संगठित किया। काठमांडू, पोखरा, ईटहरी समेत कई शहरों के कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों ने इस प्रोटेस्ट में बढ़-चढ़कर भाग लिया। यही नहीं बल्कि कई स्कूली बच्चे भी किताबें हाथ में लेकर और स्कूल यूनिफार्म पहन कर प्रदर्शन में शामिल हुए।
नेपो किड्स ट्रेंड ने किया चिंगारी का काम
नेपाल की शाशन व्यवस्था सालो से वंशवाद की राजनीती पर चल रही हैं ऐसे में NepoBaby ट्रेंड इस बात को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया गया कि कैसे कुछ राजनेता अपने बच्चों को राजनितिक पद पर आगे बड़ा रहे हैं भले ही उनमें नेतृत्व की कमी हो। Gen Z द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #NepoKids और #NepoBaby ट्रेंड चलाया गया ताकि नेताओ के बच्चो की लक्ज़री लाइफ को दिखाया जाए। युवाओ में इस बात का गुस्सा और बढ़ गया कि नेताओं के बच्चे जनता के टैक्स के पैसों पर ऐश कर रहे हैं, जबकि आम नागरिक बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे हैं।
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नेपाल के युवाओ की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारी केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं:
- नेपाल में भ्रष्टाचार का अंत हो
- पारदर्शी शासन व्यवस्था लागू हो
- नेताओं की जनता के प्रति जवाबदेही तय हो
- युवाओं के लिए अवसर और रोजगार उत्पन्न किए जाए
अब यह सिर्फ सोशल मीडिया आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह नेपाल की लोकतंत्र और समानता की लड़ाई बन चुका है।
आगे क्या हो सकता है?
पीएम के इस्तीफ़े के बाद नई सरकार बनाने को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही राजनीतिक दलों में सत्ता की खींचतान भी तेज़ हो गई है।कई मंत्री सेना की सुरक्षा में चले गए हैं, जिससे सियासी संकट और गहराया है। हालांकि इस बात की आशंका भी जताई जा रही हैं की अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं मिला तो हालात और बिगड़ सकते हैं।



