नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार (9 सितंबर) को होने वाले चुनाव में सत्ताधारी एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच कड़ा मुकाबला तय है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट के लिए भाजपा-नीत गठबंधन की स्पष्ट संख्या बढ़त होने के बावजूद, विपक्ष इसे संविधान बनाम आरएसएस-बीजेपी की वैचारिक लड़ाई बता रहा है। मंगलवार को ही इस चुनाव के नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।
उपराष्ट्रपति चुनाव में कौन मारेगा बाजी !
सियासी जानकारों के मुताबिक, इस बार ये चुनाव काफी रोचक होने वाला है। इस चुनाव को लेकर सियासत अपने चरम पर हैं। एनडीए और इंडिया गठबंधन लगातार इस चुनाव को जीतने के लिए अपने-अपने दांव लगाने में व्यस्त हैं। इस चुनाव को जीतने के लिए वहीं गठबंधन बाजी मार सकता है जिसके पास सदन में मौजूद 781 वोटों में से 391 के पार का आंकड़ो हो। चाहे वह एनडीए हो या फिर इंडिया गठबंधन।
संसद के दोनों सदनों—लोकसभा (543 सदस्य) और राज्यसभा (245 सदस्य, जिसमें 12 मनोनीत शामिल) के कुल 788 सदस्य निर्वाचक मंडल का हिस्सा हैं। वर्तमान में छह राज्यसभा और एक लोकसभा सीट रिक्त होने से कुल 781 मतदाता हैं, और बहुमत के लिए 391 वोट चाहिए। एनडीए के पास 425 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के पास 324। वाईएसआरसीपी के 11 सदस्यों ने एनडीए का साथ दिया है, वहीं बीआरएस और बीजेडी ने मतदान से दूरी बनाने का ऐलान किया है। हालांकि, 18 सांसदों का रुख अभी अस्पष्ट है, जो चुनाव को रोमांचक बना सकता है।
मतदान संसद भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
मतदान संसद भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक गोपनीय मतदान प्रणाली से होगा, जहां सांसदों को पार्टी व्हिप का पालन करने की बाध्यता नहीं है। मतपत्र पर दोनों उम्मीदवारों के नाम दिए जाएंगे और वोटर को पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने 1 (भारतीय, रोमन या किसी भारतीय भाषा के अंक में) लिखना होगा। एकल हस्तांतरणीय वोट (एसटीवी) प्रणाली के तहत बहुमत न मिलने पर वोटों का हस्तांतरण होगा। मतगणना शाम 6 बजे शुरू होगी, और परिणाम देर रात तक घोषित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने लोकसभा या राज्यसभा के महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है।
चुनाव पूर्व एनडीए और इंडिया गठबंधन की बैंठकें
चुनाव की पूर्व संध्या पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक ने अलग-अलग सांसदों की बैठकें कीं, जहां वोटिंग प्रक्रिया पर जागरूकता अभियान चलाया गया और मॉक पोल कराए गए। एनडीए राधाकृष्णन (68 वर्षीय) को तमिलनाडु के भाजपा वरिष्ठ नेता, पूर्व कोयंबटूर सांसद (1998-2004) और वर्तमान महाराष्ट्र राज्यपाल के रूप में पेश कर रहा है। वे आरएसएस से जुड़े नरम स्वभाव के नेता हैं, जिन्होंने तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत किया। एनडीए का दावा है कि उनकी राजनीतिक-प्रशासनिक क्षमता राज्यसभा सभापति के रूप में सदनों के बीच सामंजस्य लाएगी।
विपक्ष के उम्मीदवार रेड्डी (79 वर्षीय), तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (2007-2011) के रूप में विख्यात हैं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज (1995 से), गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (2005) और गोवा के पहले लोकायुक्त (2013, सात महीने बाद इस्तीफा) रह चुके रेड्डी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रगतिशील न्यायविद बताया है। उनके प्रमुख फैसलों में सलवा जुडूम को असंवैधानिक घोषित करना (2011, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद विरोधी अभियान पर झटका), काले धन की जांच में केंद्र सरकार की सुस्ती पर तीखी आलोचना और विदेशी बैंकों से अवैध धन वापस लाने के लिए विशेष जांच दल गठन का आदेश शामिल है, जो 2014 चुनाव में भाजपा का प्रमुख मुद्दा था।
रेड्डी के सलवा जुडूम फैसले ने अभियान में विवाद पैदा किया, जब गृह मंत्री अमित शाह ने इसे माओवाद विरोधी प्रयासों पर झटका बताया। विपक्ष रेड्डी को सामाजिक आर्थिक न्याय का साहसी समर्थक बता रहा है। रविवार को वीडियो संदेश में रेड्डी ने सांसदों से अपील की, यह वोट केवल उपराष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और लोकतंत्र के मंदिर को मजबूत करने के लिए है। पार्टी निष्ठा से ऊपर उठें।
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संख्या बल से राधाकृष्णन की जीत तय
यह चुनाव राज्यसभा की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जहां उपराष्ट्रपति सभापति होता है। विपक्ष एकजुटता दिखाने के लिए मुकाबला लड़ रहा है, लेकिन संख्या बल से राधाकृष्णन की जीत तय मानी जा रही है।



