नई दिल्ली: चीन के तियानजिन शहर में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय लिखा है। सोमवार को एक ऐतिहासिक पल तब सामने आया, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंच पर गर्मजोशी से मुलाकात की। तीनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाए और कुछ देर तक हंसी-मजाक के साथ बातचीत की। इस तस्वीर ने न केवल SCO के मंच को सुर्खियों में ला दिया, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक मजबूत संदेश दिया, जिन्होंने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ लगाए हैं।
तियानजिन में तिकड़ी की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात की तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “तियानजिन में विचारों का आदान-प्रदान जारी! SCO शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ सार्थक चर्चा।” यह तस्वीर उस समय की है, जब तीनों नेता एक-दूसरे के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत कर रहे थे, जबकि पास ही खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इसे देख रहे थे। यह दृश्य वैश्विक कूटनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा करता है, खासकर तब जब अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते ट्रंप के टैरिफ के कारण तनावपूर्ण हैं।
SCO का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन
इस साल का SCO शिखर सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है। चीन, जो इस बार SCO की अध्यक्षता कर रहा है, ने ‘SCO प्लस’ के तहत 20 से अधिक देशों के नेताओं और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भी इस सम्मेलन में शामिल हैं। रविवार रात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक भव्य स्वागत समारोह और भोज का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और अन्य वैश्विक नेता शामिल हुए। शी जिनपिंग ने अपने स्वागत भाषण में कहा, SCO पर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। यह सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ’ की एकता को मजबूत करेगा और मानव सभ्यता की प्रगति में योगदान देगा। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों, जैसे बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों का सामना करने के लिए सहयोग पर जोर दिया।
मोदी-शी और मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास साझेदार हैं। मोदी ने शी को 2026 में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया, जिसे शी ने स्वीकार कर लिया। सोमवार को मोदी की रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिश हो रही है, खासकर तब जब अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर सवाल उठाए हैं।
ट्रंप के टैरिफ और SCO की रणनीति
SCO शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका ने भारत और चीन पर भारी टैरिफ लगाए हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% टैरिफ लागू किया है, जिसमें 25% अतिरिक्त टैरिफ सजा के रूप में है। इसने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा किया है। ऐसे में, भारत, चीन और रूस का यह गठजोड़ एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर संकेत देता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन ट्रंप के लिए एक चेतावनी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शी जिनपिंग इस मंच का उपयोग कर यह दिखाना चाहते हैं कि चीन एक स्थिर और विश्वसनीय वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है, जो अमेरिका के एकध्रुवीय प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।
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SCO का वैश्विक महत्व
2001 में स्थापित SCO में अब 10 पूर्ण सदस्य देश, दो पर्यवेक्षक और 14 संवाद साझेदार शामिल हैं, जो विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस साल के सम्मेलन में तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया और नेपाल जैसे देशों के नेता भी शामिल हैं, जिससे इसका वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया है। यह शिखर सम्मेलन न केवल क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का मंच है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का भी संकेत देता है। मोदी, पुतिन और शी की यह तिकड़ी निश्चित रूप से विश्व मंच पर चर्चा का केंद्र बनी रहेगी।



