नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने सितम्बर में होने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों से पहले कॉलेज प्रिंसिपलों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस बार छात्रो द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान प्रॉपर्टी की डिफेसमेंट (पोस्टर-बैनर लगाकर गंदगी फैलाना) रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने ये सख्त कदम उठाए हैं।
HC की फटकार के बाद सख्त हुआ DU
पिछले साल DUSU चुनावों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर, बैनर और दीवारों पर नारे लिखे जाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने डीयू को फटकार लगाई थी। इसी के बाद 18 अगस्त को DU ने यूनिवर्सिटी कमिटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी (UCPDP) का गठन किया। यह कमिटी चुनावों के दौरान डिफेसमेंट रोकने की निगरानी करेगी।
कॉलेज प्रिंसिपल्स बने ‘एंटी-डीफेसमेंट हेड’
27 अगस्त को DU की तरफ से जारी निर्देशों के अनुसार, सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को उनके कॉलेज का “एंटी-डीफेसमेंट हेड” बनाया गया है। अब उनकी जिम्मेदारी होगी कि छात्रो को कॉलेज कैंपस और उसके आसपास किसी भी तरह के पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स, या दीवारों पर लिखाई की अनुमति न दी जाए।
हर कॉलेज में बनेगी डिफेसमेंट रोकथाम कमिटी
DU ने आदेश दिया है कि हर कॉलेज में एक खास कमिटी बनेगी, जिसमें शामिल होंगे:
- प्रिंसिपल द्वारा चुना गया एक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य होगा।
- स्थानीय पुलिस स्टेशन के SHO का नामित प्रतिनिधि होना जरुरी।
- कमिटी के सभी सदस्यों के नाम और संपर्क विवरण कॉलेज की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर तुरंत जारी करने होंगे।
सोशल मीडिया सेकिया जाएगा प्रचार
DU प्रशासन ने अभियार्थियो को पेपर-बेस्ड प्रचार से हटकर ई-कम्युनिकेशन को अपनाने की सलाह दी है। इसके लिए सोशल मीडिया, ईमेल्स और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
- चुनावों के दौरान कॉलेजों को हर तरह के डिफेसमेंट पर कड़ी नजर बनाई रखनी होगी।
- अगर किसी उम्मीदवार या समर्थक को नियम तोड़ते पाया जाता है, तो रिपोर्ट तुरंत ही रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी।
- नियम उल्लंघन करने वालों की चुनाव के लिए उम्मीदवारी रद्द भी की जा सकती है।
‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ की सुविधा
विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को यह निर्देश दिया है कि वे छात्रों के लिए एक “Walls of Democracy” उपलब्ध कराएं। जिस पर छात्र अपने हैंडमेड पोस्टर, बैनर और नारे लगा सकेंगे, ताकि कॉलेज के अन्य जगहों पर दीवारों को नुकसान न हो।
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स्थानीय पुलिस और प्रिंटिंग यूनिट्स पर भी नजर
कॉलेज के प्रिंसिपलों को स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उन प्रिंटिंग प्रेस और दुकानों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, जो चुनावी प्रचार सामग्री तैयार करते हैं। इससे बिना प्रशाशन की अनुमति के पोस्टर और बैनर छपवाने पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी।
निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय की ये नई गाइडलाइंस छात्रों के बीच स्वच्छ चुनाव की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इस बार विश्वविद्यालय की कोशिश है कि सोशल मीडिया आधारित प्रचार को ज्यादा बढ़ावा दिया जाए, ताकि कैंपस और सार्वजनिक स्थानों को नुकसान न पहुंचे।



