बिहार में क्यों राहुल की यात्रा में शामिल हो रहे हैं इंडि गठबंधन के नेता

राहुल गांधी की यात्रा में तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन भी शामिल हो गए हैं और जल्द ही अखिलेश यादव भी शामिल होने जा रहे हैं ।

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नई दिल्ली : बिहार में SIR को लेकर चल रही राहुल गांधी की यात्रा में तेजस्वी के बाद अब तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन भी शामिल हो गए हैं और जल्द ही अखिलेश यादव भी शामिल होने जा रहे हैं । माना जा रहा है कि इंडि गठबंधन में रहे कुछ और दलों के नेता भी इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं । लेकिन आखिर क्या वजह है कि जिन नेताओं का बिहार से कोई बड़ा वास्ता नहीं है, वे भी राहुल की यात्रा में शामिल हो रहे हैं ? क्या इसके भी कोई राजनीतिक मायने हैं ?

SIR का विरोध

ये समझने की जरुरत है कि राहुल की यात्रा सिर्फ बिहार चुनाव को लेकर नहीं है। उन्होंने इस यात्रा में एसआईआर को मुख्य मुद्दा बनाया है और वोट चोरी का नारा भी दिया है। दरअसल, दूसरे राज्यों के नेताओं को भी अब लगने लगा है कि अगर एसआईआर का बिहार में जमकर विरोध नहीं हुआ तो यही प्रयोग दूसरे राज्यों में भी किया जा सकता है। जाहिर है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका खामियाजा इन पार्टियों और उनके नेताओं को भी होगा। यही वजह है कि ये नेता, राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होकर एक तरह से ये संदेश देना चाहते हैं कि उनके राज्य में इस तरह की कोशिश हुई तो उसका जमकर विरोध होगा। यही वजह है कि वे भले ही राहुल गांधी की यात्रा में शामिल हो रहे हों लेकिन वे संदेश अपने राज्य के लिए देना चाहते हैं।

एकता का प्रदर्शन

दूसरी वजह ये है कि इंडि गठबंधन के नेता चाहते हैं कि बीजेपी के खिलाफ उनकी एकता सिर्फ ड्राइंग रूम में ही न हो बल्कि सड़कों पर भी दिखेगी, तभी बीजेपी के खिलाफ उनकी एकता को समर्थन मिल सकेगा। बिहार में पिछले चुनाव में भी आरजेडी और कांग्रेस के बीच गठबंधन था लेकिन उस वक्त सिर्फ सीटों के बंटवारे के अलावा उनमें कहीं एकजुटता नजर नहीं आयी। यहां तक की उनके कैडर तक भी पूरा मैसेज नहीं गया। नतीजा ये हुआ कि गठबंधन के बावजूद उन्हें हार मिली। अब कांग्रेस, आरजेडी और उनकी सहयोगी दूसरी पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता जिस तरह से इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं, उसका राज्य में असर नजर आ रहा है। यही वजह है कि बीजेपी के सहयोगी भी खुलकर एसआईआर का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं।

बीजेपी का मुकाबला

बीजेपी विरोधी कई दलों को अब लगने लगा है कि अगर बीजेपी का मुकाबला नहीं किया तो आने वाले दिनों में उनके राज्य में भी बीजेपी काबिज हो सकती है। ओडिसा का उदाहरण उनके सामने है। यही वजह है कि अब राहुल गांधी की स्थिति पहले की तरह नहीं रही है। उन्हें लगता है कि अब राहुल गांधी राजनीतिक तौर पर परिपक्व नजर आने लगे हैं। ऐसे में अगर राहुल गांधी मजबूत होते हैं तो जाहिर है कि बीजेपी कमजोर होगी और अपने राज्य में वे बीजेपी और नरेन्द्र मोदी का बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकेंगे।

Gulshan Rai Khatri

gulshanraikhatri@gmail.com

गुलशन राय खत्री 35 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता में हैं। दैनिक जागरण और जनसत्ता में रिपोर्टिंग के बाद नवभारत टाइम्स में लगभग 33 साल तक पत्रकारिता की। सिटी रिपोर्टिंग के अलावा नवभारत टाइम्स के नैशनल ब्यूरो में रहते हुए नैशनल बीजेपी, रेलवे, शहरी विकास, रोड ट्रांसपोर्ट जैसे कई मंत्रालयों की रिपोर्टिंग की। बाद में 6 साल नवभारत टाइम्स में मेट्रो एडिटर रहने के बाद रिटायर हुए। अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं और न्यूजी इंडिया के लिए भी लिखते हैं।

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