लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को पार्टी संगठन में बड़े बदलाव किए हैं। बसपा सुप्रीमो ने अपने भतीजे आकाश आनंद को प्रमोशन देते हुए उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह पद बीएसपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है।
आकाश आनंद सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे
इस नियुक्ति के साथ आकाश आनंद पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए हैं। इससे पहले आकाश राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रहे थे। आकाश सभी सेक्टर, केंद्रीय और स्टेट कोऑर्डिनेटरों और प्रदेश अध्यक्षों की काम की समीक्षा करेंगे। वह सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे।
अब छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर
अब चार के स्थान पर छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं। रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं। ये सभी आकाश आनंद को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही को आर्डिनेटर राजाराम के साथ मोहित आनंद, अतर सिंह राव के साथ सुरेश आर्या और धर्मवीर अशोक के साथ दयाचंद को लगाया गया है। जो अपने-अपने को-आर्डिनेटर को रिपोर्ट करेंगे। रामजी गौतम को दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार का प्रभारी बनाया गया है।
इन्हें बनाया गया प्रदेश अध्यक्ष
विश्वनाथ पाल को फिर से उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा राजेश तंवर को दिल्ली, रमाकांत पिप्पल को मध्य प्रदेश, श्याम टंडन छत्तीसगढ़, व शंकर महतो को बिहार और डॉ. सुनील डोंगरे को महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मनोज हवलदार को पश्चिम बंगाल, सरोज कुमार नायक को ओडिशा, बंदेला गौतम को आंध्र प्रदेश, इब्राम शेखर को तेलंगाना को गुजरात, विक्रम सिंह नायर को हिमाचल प्रदेश, पी. आनंद को तमिलनाडु, एम. कृष्णा मूर्ति को कर्नाटक, ज्वाय आर. थामस को केरल को केरल, कृष्ण जमारपुर को हरियाणा, अवतार सिंह करीपुरी को पंजाब, प्रेम बारुपाल को राजस्थान, को झारखंड, दर्शन राणा को जम्मू कश्मीर, बृजपाल को चंडीगढ़ और अमरजीत सिंह को उत्तराखंड का अध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया है।
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आकाश आनंद का सफर
आकाश आनंद, जो लंदन से एमबीए की डिग्री धारक हैं, को मायावती ने पहले 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया था। हालांकि, उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव के चलते मार्च 2025 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। अप्रैल में उनकी सार्वजनिक माफी और पार्टी के प्रति समर्पण के बाद मायावती ने उन्हें फिर से शामिल किया। अब उनकी यह नई नियुक्ति पार्टी में उनके बढ़ते कद को दर्शाती है।



