नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के रूप में रेड्डी द्वारा लिए गए एक फैसले के कारण देश में नक्सलवाद दो दशकों से अधिक समय तक चला। शाह का यह बयान तब आया है जब उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अमित शाह ने सीधे तौर पर रेड्डी के फैसले को नक्सलवाद के बढ़ने का कारण बताया है।
क्या है मामला
अमित शाह ने सलवा जुडूम को खारिज करने के सुदर्शन रेड्डी के फैसले का जिक्र किया। सलवा जुडूम, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ एक नागरिक मिलिशिया आंदोलन था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
ANI से बात करते हुए अमित शाह ने कहा, “उन्होंने (सुदर्शन रेड्डी) सलवा जुडूम को रद्द कर दिया। उन्होंने आदिवासियों की आत्मरक्षा की प्रक्रिया को ही खत्म कर दिया। इसी वजह से इस देश में नक्सलवाद दो दशक से ज्यादा समय तक चला।”
वामपंथी विचारधारा का आरोप: अमित शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सुदर्शन रेड्डी को इसलिए चुना है क्योंकि उनका झुकाव वामपंथी विचारधारा की तरफ है।
पहले भी साधा था निशाना
- यह पहली बार नहीं है जब अमित शाह ने रेड्डी पर हमला बोला है। इससे पहले भी उन्होंने सलवा जुडूम के फैसले का हवाला देते हुए उन पर निशाना साधा था। यह बयान तब आया है जब उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और दोनों पक्षों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
- अमित शाह के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर विपक्ष के उम्मीदवार की साख पर सवाल उठाता है।
सलवा जुडूम क्या था
- सलवा जुडूम का मतलब गोंडी भाषा में “शांति का कारवां” है।
- यह छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 में शुरू किया गया एक नागरिक मिलिशिया आंदोलन था, जिसका उद्देश्य स्थानीय आदिवासियों को नक्सलियों के खिलाफ हथियार उठाना सिखाना था।
- इस आंदोलन को तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार का समर्थन प्राप्त था।
- सरकार ने आदिवासियों को विशेष पुलिस अधिकारी (SPOs) के रूप में भर्ती किया और उन्हें नक्सलियों से लड़ने के लिए हथियार दिए।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सुदर्शन रेड्डी की भूमिका
- सलवा जुडूम के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है और इसमें शामिल SPOs ने कई अत्याचार किए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में सलवा जुडूम को असंवैधानिक घोषित कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच में तत्कालीन न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी भी शामिल थे, जिन्होंने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
- फैसले में कोर्ट ने कहा था कि सरकार नागरिकों को हथियार देकर उन्हें आपस में लड़ने के लिए नहीं कह सकती। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को SPOs को बर्खास्त करने का निर्देश दिया था।
अमित शाह का आरोप
- अमित शाह का आरोप है कि सुदर्शन रेड्डी के इस फैसले ने आदिवासियों से अपनी आत्मरक्षा का अधिकार छीन लिया।
- उनका कहना है कि इस फैसले के कारण नक्सलवाद को दोबारा पनपने का मौका मिला और वह दो दशकों से ज्यादा समय तक जारी रहा।
- शाह यह भी आरोप लगा रहे हैं कि विपक्ष ने रेड्डी को उनकी वामपंथी विचारधारा के कारण चुना है, जो नक्सलवाद के प्रति नरम मानी जाती है।
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राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
- अमित शाह के इस हमले का समय बेहद महत्वपूर्ण है। यह उपराष्ट्रपति चुनाव के ठीक बीच में आया है।
- बीजेपी लगातार सुदर्शन रेड्डी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश कर रही है, जिसने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया।
- यह बीजेपी की नक्सलवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की नीति के अनुरूप है, जिसका हवाला देकर वह अक्सर अपनी सरकार के फैसलों को सही ठहराती है।
- वहीं, विपक्ष सुदर्शन रेड्डी के फैसले को मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए एक साहसिक कदम मानता है।
- इस प्रकार, यह पूरा मुद्दा केवल एक चुनावी आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों की बहस से जुड़ा हुआ है।



