10 साल में 35% बढ़ा यूरिया का उत्पादन और 44 फीसदी डीएपी

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नई दिल्ली: यूरिया में रिकॉर्ड 35 प्रतिशत वृद्धि हुई है। डीएपी/एनपीके उत्पादन भी 44 प्रतिशत बढ़ा है। लिहाजा खरीफ 2025 में उर्वरक की आसानी से उपलब्धता बनी रही। 

यूरिया उत्पादन 2013-14 में 227.15 लाख मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर 306.67 लाख मीट्रिक टन हो गया है। डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का संयुक्त उत्पादन 110.09 लाख मीट्रिक टन से वृद्धि के बाद 158.78 लाख मीट्रिक टन हो गया है। 

उर्वरक विभाग उपलब्ध करा रहा खाद

उर्वरक विभाग (डीओएफ) को देश भर में उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। फसल की प्रत्येक सीजन की शुरुआत से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्ल्यू) राज्यवार उर्वरक की आवश्यकताओं का आकलन करता है। इन अनुमानों के आधार पर, उर्वरक विभाग मासिक, राज्यवार और कंपनीवार आपूर्ति योजना जारी करता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति ने देश में उर्वरकों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। लाल सागर में जारी संकट ने देश में उर्वरकों की आपूर्ति बाधित कर दी है। इसके परिणामस्वरूप केप ऑफ गुड होप के रास्ते शिपमेंट का मार्ग बदलना पड़ा है जिससे माल ढुलाई के रूट में 6,500 किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे विशेष रूप से डीएपी के लिए माल ढुलाई का समय काफी बढ़ गया है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-ईरान युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि की है।

ये उठाए गए कदम

इन वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने समय पर राजनयिक संपर्क, रसद संबंधी क्रियाकलाप और दीर्घकालिक व्यवस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया है कि हमारे किसानों को किसी भी कमी का सामना न करना पड़े। 

  • भारतीय उर्वरक कंपनियों और मोरक्को के संघ के बीच 25 लाख मीट्रिक टन डीएपी और टीएसपी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। 
  • जुलाई 2025 में सऊदी अरब और भारतीय कंपनियों के बीच 2025-26 से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए 31 लाख मीट्रिक टन डीएपी की वार्षिक आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक समझौते (एलटीए) पर हस्ताक्षर किए गए।

मांग से ज्यादा है यूरिया

देश में कुल 143 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। उपलब्धता 183 लाख मीट्रिक टन यूरिया है। इसकी बिक्री 155 लाख मीट्रिक टन है। डीएपी में 45 लाख मीट्रिक टन की आनुपातिक आवश्यकता के मुकाबले उपलब्धता 49 लाख मीट्रिक टन है और 33 लाख मीट्रिक टन की बिक्री हुई है। एनपीके में, 58 लाख मीट्रिक टन की आनुपातिक आवश्यकता के मुकाबले 97 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अब तक 64.5 लाख मीट्रिक टन एनपीके की बिक्री हुई है।

13 लाख मीट्रिक टन बिक्री बढ़ी

20 अगस्त तक यूरिया की बिक्री पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 13 लाख मीट्रिक टन से अधिक बढ़ गई है।इसके बावजूद उर्वरक विभाग ने वैश्विक निविदाओं के माध्यम से घरेलू उत्पादन और खरीद को अधिकतम करके देश भर में यूरिया की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है।

किसानों पर बोझ नहीं

किसानों को उर्वरकों की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से बचाने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है। यूरिया किसानों को 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग (नीम कोटिंग और लागू करों को छोड़कर) उपलब्ध कराया जा रहा है। 1350 रुपये प्रति बैग पर डीएपी खाद मिल रही है।

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