नई दिल्ली: एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) योजना से देश के कृषि को क्षेत्र को काफी मजबूती मिली है। इसके जरिये इस सेक्टर में करीब 66 हजार प्रजेक्ट भी शुरू हुए हैं। इनमें एक लाख करोड़ रुपये का निवेश भी आया है। ये बातें इस योजना के मूल्यांकन में निकलकर सामने आई हैं। कृषि आर्थिक अनुसंधान केंद्र (एईआरसी) दिसंबर 2023 में योजना की प्रगति और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। ये जानकारियां केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में दी।
70 फीसदी का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा
मुल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 31% एआईएफ इकाइयों ने सरकारी सब्सिडी का भी लाभ उठाया। कुल इकाइयों में से लगभग 85% इसलिए शुरू हो सकीं, क्योंकि इनको योजना के तहत आसानी से लोन मिल गया। उनके प्रोजक्ट की लागत औसतन 40 प्रतिशित एआईएफ लोन से पूरा हो गया। इतना ही नहीं लगभग 70% इकाइयों ने नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए ऋण लिया।
उम्मीद से ज्यादा मिला रोजागार
मूल्यांकन रिपोर्ट की मानें तो एआईएफ योजना रोजगार के अवसर पैदा करने में भी अहम किरदार निभा रही है। स्लेक सीजन की तुलना में पीक जीन में अपेक्षा से अधिक एआईएफ इकाई से रोजगार पैदा हुए। यानी हर यूनिट में 11 लोगों को रोजगार मिला। राजस्थान में सबसे अधिक 27 लोगों को रोजगार मिला। हालांकि महाराष्ट्र में सबसे कम पांच लोगों को मिला। Periodic Labour Force Survey (PLFS) जुलाई 2023-जून 2024 के आंकड़े बताते हैं कि देश में 46.1% लोगों की रोजी-रोटी कृषि क्षेत्र से चलती है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 17.8 प्रतिशत का योगदान दिया है।
एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट नौकरी देन में आगे
रोजगार के अवसर से ज्यादा एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट में पैदा हुए। नमूना एआईएफ गोदामों, शीत भंडारण इकाइयों और साइलो की ओर से निर्मित कुल क्षमता लगभग 879 हज़ार मीट्रिक टन है। साथ ही, इन इकाइयों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2900 हज़ार वर्ग फुट है। इनमें कमाई और प्रोडक्शन में संतोषनजक प्रतिक्रिया मिली।
ग्रामीण किसानों को फायदा ज्यादा
अधिकांश इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। व्यक्तियों के मूल्यांकन में सम्मिलित लगभग 54% का मानना था कि एआईएफ इकाइयों के कारण किसानों की आय में वृद्धि हुई है और उनमें से अधिकांश ने बताया कि आय में वृद्धि बहुत अधिक और संतोषजनक थी।
1.7 लाख करोड़ का निवेश हुआ
30 जून, 2025 तक एआईएफ के तहत 1,13,419 प्रजेक्टों के लिए 66,310 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन जरिये 107,502 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। 30,202 कस्टम हायरिंग सेंटर, 22,827 प्रसंस्करण इकाइयां, 15,982 गोदाम, 3,703 सॉर्टिंग एंड ग्रेडिंग यूनिट, 2,454 कोल्ड स्टोर प्रोजेक्टस, 38,251 अन्य प्रकार की फसलोपरान्त प्रबंधन परियोजनाएं और व्यवहार्य सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियां शामिल हैं।
एग्रीकल्चर प्रोक्डटिविटी बढ़ाने के लिए चल रहीं योजनाएं
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशनः एनएफएसएनएम के तहत किसानों को फसल उत्पादन एवं सुरक्षा तकनीकों, फसल प्रणाली-आधारित प्रदर्शनों, नई किस्मों/संकर किस्मों के प्रमाणित बीजों के वितरण, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन तकनीकों, उन्नत कृषि उपकरणों/औजारों/संसाधन संरक्षण मशीनरी, जल बचत उपकरणों, फसल सीजन के दौरान प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण आदि पर प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।
कृषि मशीनीकरण उप-मिशनः सरकार छोटे और सीमांत किसानों और बिजली की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों को में कृषि मशीनीकरण बढ़ावा दे रही है ताकि छोटे भू-स्वामित्व और व्यक्तिगत स्वामित्व की उच्च लागत के कारण उत्पन्न होने वाली प्रतिकूल इकॉनमी ऑफ स्केल की प्रतिपूर्ति के लिए ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ को बढ़ावा मिल सके। इसके लिए राज्य सरकारों के माध्यम से स्कीम ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (एसएमएएम) चलाई जा रही है।
प्रति बूंद अधिक फसलः पीडीएमसी सूक्ष्म सिंचाई या ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेत स्तर पर जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ उर्वरक उपयोग (फर्टिगेशन के माध्यम से), श्रम व्यय, अन्य इनपुट लागत में कमी आती है और इस प्रकार किसानों की समग्र आय में वृद्धि होती है।



