नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एक नए विधेयक पर सियासी हंगामा मच गया है, जिसमें 30 दिन जेल में बिताने वाले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पद से हटाने का प्रावधान है। RJD ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे भाजपा की एक ‘चाल’ बताया है।
बिल पर RJD का तीखा हमला
केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में संविधान का 130वां संशोधन विधेयक पेश किया, जिसमें ऐसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है, जो भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर आरोपों में 30 दिन या उससे अधिक समय तक जेल में रहते हैं। इस बिल का विरोध करते हुए, आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कटाक्ष किया कि इस बिल के जरिए गृह मंत्री अमित शाह अपनी ही पार्टी (बीजेपी) के कुछ नेताओं को निशाना बना रहे हैं। मनोज झा ने गुरुवार को कहा कि यह बिल उन राज्यों में सरकारों को अस्थिर करने के लिए लाया गया है, जहां बीजेपी चुनाव नहीं जीत पाती। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अब विधायकों की खरीद-फरोख्त की बजाय इस विधेयक का इस्तेमाल कर विरोधी सरकारों को गिरा देगी।
‘आरोपी और दोषी के बीच का अंतर मिटा’
आरजेडी सांसद ने इस बिल को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि यह ‘आरोपी और दोषी के बीच के अंतर को मिटा देगा’। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) राजनीतिक खेल का हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में किसी पर भी मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का मामला दर्ज करके उसे जेल में डाला जा सकता है, और इस बिल के जरिए उसे पद से भी हटाया जा सकता है।
‘सरकार को दंडित करने का अधिकार नहीं’
आरजेडी के लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने भी बिल का विरोध करते हुए कहा कि किसी को दंडित करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बिल के जरिए केंद्र सरकार यह अधिकार ले रही है कि वह खुद ही केस दर्ज करेगी और खुद ही पद से हटा देगी। सुधाकर सिंह ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने पर कुछ नेता इस्तीफा देते हैं और कुछ नहीं, लेकिन सरकार को उन्हें सीधे पद से हटाने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।
यह बिल ऐसे समय में पेश किया गया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कर रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि ये एजेंसियां राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही हैं। ऐसे में, इस बिल का आना विपक्ष को यह शक करने का मौका देता है कि सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल करके विपक्षी सरकारों को गिराना चाहती है।
RJD का राजनीतिक दृष्टिकोण
आरजेडी ने इस बिल पर जो तंज कसा है, वह उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति से भी जुड़ा है। आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव खुद कई मामलों में आरोपी रहे हैं और उन्हें जेल भी जाना पड़ा है। उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। इसलिए, आरजेडी इस बिल को अपने और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक संभावित हथियार के रूप में देख रही है।
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खरीद-फरोख्त बनाम कानून का इस्तेमाल
आरजेडी सांसद मनोज झा का यह बयान कि भाजपा अब विधायकों की खरीद-फरोख्त की बजाय इस बिल का इस्तेमाल करेगी, एक गंभीर आरोप है। यह आरोप इस बात की ओर इशारा करता है कि भाजपा जिन राज्यों में बहुमत नहीं जुटा पाती, वहां सरकार गिराने के लिए इस तरह के कानूनी दांव-पेंच का सहारा ले सकती है। यह खबर सिर्फ एक विधेयक पर राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, लोकतंत्र में आरोप और दोष के बीच के अंतर, और विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने की राजनीति से जुड़ी है।



