पटना: बिहार में चौथी शिक्षक बहाली (BPSC TRE-4) से पहले STET परीक्षा आयोजित करने की छात्रों की मांग पर सरकार अब गंभीरता से विचार कर रही है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर अगले 8-10 दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा, जिससे उन लाखों युवाओं में उम्मीद जगी है जो बिना STET के TRE-4 में शामिल नहीं हो सकते। यह फैसला सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उसे एक ओर शिक्षकों की कमी जल्द पूरी करनी है, तो दूसरी ओर आंदोलनरत छात्रों की मांगों को भी शांत करना है।
STET को लेकर सरकार का रुख
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने गुरुवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार भी चाहती है कि जल्द से जल्द STET परीक्षा हो। उन्होंने अभ्यर्थियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही।
विचार-विमर्श: शिक्षा मंत्री ने बताया कि अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बात चल रही है।
टीआरई-4 की तैयारी: उन्होंने यह भी बताया कि BPSC TRE-4 के लिए विषयवार शिक्षकों की कमी का आकलन किया गया है और इसकी अधियाचना (रिक्ति विवरण) अगस्त के अंत तक बीपीएससी को भेज दी जाएगी।
स्पष्टता: शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि BPSC TRE-4 से पहले STET होगा या नहीं।
टीआरई-5 का आयोजन: उन्होंने संकेत दिए कि BPSC TRE-5 का आयोजन विधानसभा चुनाव के बाद होगा।
अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और मांग
पिछले कुछ समय से BPSC TRE-4 से पहले STET कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालिया प्रदर्शन: 18 अगस्त को पटना में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने मार्च निकाला था, जिन्हें पुलिस ने खदेड़ दिया था। इससे पहले 7 अगस्त को भी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई थीं।
अभ्यर्थियों का तर्क: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने साल में दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने का वादा किया था, लेकिन पिछले डेढ़ साल से एक बार भी STET का आयोजन नहीं हुआ है। उनका मानना है कि पहले STET होना चाहिए ताकि अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवार BPSC TRE-4 में शामिल हो सकें।
शिक्षा विभाग की नीति और युवाओं की मांग
बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर एक लंबे समय से उथल-पुथल रही है। सरकार ने साल में दो बार STET (State Teacher Eligibility Test) आयोजित करने की घोषणा की थी, ताकि अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवार शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो सकें। हालांकि, पिछले डेढ़ साल से यह परीक्षा नहीं हुई है।
इस बीच, सरकार ने BPSC TRE-4 (चौथे चरण की शिक्षक भर्ती) की तैयारी शुरू कर दी है। इससे उन छात्रों में नाराजगी है जिन्होंने STET पास नहीं किया है। उनकी मुख्य मांग है कि पहले STET आयोजित किया जाए ताकि वे भी BPSC TRE-4 में शामिल होने के योग्य बन सकें। छात्रों का मानना है कि सीधे TRE-4 कराने से वे एक बड़े अवसर से वंचित हो जाएंगे।
छात्रों का लगातार आंदोलन
यह खबर केवल एक सरकारी बयान नहीं है, बल्कि यह छात्रों के लगातार आंदोलन का परिणाम है। पिछले कुछ हफ्तों से, पटना में कई बार छात्रों ने STET की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, जिससे मामला और गरमा गया। यह घटनाक्रम सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह छात्रों की मांग पर विचार करे।
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सरकार के लिए चुनौती
शिक्षा मंत्री का यह बयान कि सरकार इस पर विचार कर रही है, यह दर्शाता है कि सरकार छात्रों के दबाव को समझ रही है। सरकार को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है:
जल्द भर्ती: सरकार जल्द से जल्द शिक्षकों की कमी को पूरा करना चाहती है और TRE-4 को निर्धारित समय पर कराना चाहती है।
छात्रों की संतुष्टि: दूसरी तरफ, उसे बड़ी संख्या में आंदोलनरत छात्रों को भी शांत करना है जो STET के बाद ही भर्ती परीक्षा चाहते हैं। यह मुद्दा अब सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है, और अगले कुछ दिनों में इस पर कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। यह खबर शिक्षा विभाग की नीति और छात्रों के अधिकारों के बीच के टकराव को दर्शाती है। यह दिखाता है कि कैसे सरकार को एक तरफ भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ उसे बेरोजगार युवाओं की मांगों को भी सुनना और समझना है।



