UNSC में भारत का पाक पर हमला, 1971 की यौन हिंसा का दिया हवाला

UNSC में भारत ने पाक पर हमला बोलते हुए 1971 से लेकर आज तक अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों को उजागर किया और दोषियों को सजा देने की मांग की।

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नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान (India-Pakistan) को कड़े शब्दों में घेरा। भारत के स्थायी मिशन में तैनात राजनयिक एल्डस मैथ्यू पुन्नूस (Aldos Matthew Punnose) ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को आईना दिखाते हुए कहा कि यह देश दशकों से महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ गंभीर अपराध करता आ रहा है। आज भी भारत ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान की न्यायपालिका ने कई मामलों में इन कृत्यों को मान्यता दी है, जो बेहद शर्मनाक और विडंबनापूर्ण है। 

भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराध आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहे। पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत में आए दिन लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और यौन हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं। ये घटनाएं केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि राज्य प्रायोजित उत्पीड़न का हिस्सा हैं।

“दोषियों को सजा मिलनी चाहिए”

भारतीय राजनयिक पुन्नूस ने कहा कि संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा (Sexual Violence in Conflict) करने वाले दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि ऐसे अपराधों की निंदा ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई भी करे। भारत का मानना है कि न्याय तभी पूरा होगा जब अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।

धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा पीड़ित

भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों (Minority Rights in Pakistan) की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। वक्तव्य में कहा गया कि वहां हिंदू, सिख, ईसाई और अन्य धार्मिक तथा जातीय अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों को सबसे ज्यादा उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (OHCHR) की रिपोर्टों में भी पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन, बाल विवाह, मानव तस्करी और यौन हिंसा के मामलों का उल्लेख किया गया है।

न्यायपालिका भी शामिल?

भारत ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान की न्यायपालिका ने कई मामलों में इन कार्यों को मान्यता दी है, जो बेहद शर्मनाक और विडंबनापूर्ण है। अपराधियों को संरक्षण देने की यह प्रवृत्ति इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान में न्याय की जगह पाखंड को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत के अनुसार, यह दोहरा रवैया न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख को गिराता है, बल्कि पीड़ित महिलाओं के साथ एक और अन्याय करता है।

भारत का सख्त संदेश

भारत ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट कर दिया कि ऐसे अपराधों को छिपाने या टालने की कोशिश अब नहीं चलेगी। यदि पाकिस्तान वास्तव में मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करता है, तो उसे अपनी धरती पर हो रहे इन अपराधों के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे। अन्यथा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी पोल लगातार खुलती रहेगी।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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