उपभोक्ता आयोग ने एक साल में निपटाए 100 प्रतिशत से अधिक केस

उपभोक्ता आयोग के साथ दस राज्यों ने 100 फीसदी से ज्यादा मामले निपटाए हैं। इस मामले में तमिलनाडु अव्वल रहा। इसकी एक वजह ई-जागृति प्लेटफार्म भी बना।

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के साथ 10 राज्यों ने जुलाई में 100 प्रतिशत से अधिक मामले निपटाए हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एनसीडीआरसी ने 122 प्रतिशत की निपटान दर हासिल की जबकि तमिलनाडु में 277, राजस्थान में 214, तेलंगाना में 158, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 150, मेघालय में 140, केरल में 122, पुद्दुचेरी में 111, छत्तीसगढ़ में 108 और उत्तर प्रदेश में 101 की निपटान दर दर्ज की गई है। 

1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक की अवधि के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश भर में उपभोक्ता मामलों का समग्र निपटान 2024 की इसी अवधि की तुलना में बहुत अधिक है। 

ई-जागृति प्लेटफार्म पर दो लाख मामले दर्ज

6 अगस्त तक एनआरआई सहित दो लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने ई-जागृति प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है। इस साल 85,531 मामले दर्ज किए गए। 1 जनवरी, 2025 को ई-जागृति की शुरुआत की। सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया यह प्लेटफॉर्म ओसीएमएस, ई-दाखिल, एनसीडीआरसी सीएमएस और कॉन्फोनेट पोर्टल जैसी पुरानी प्रणालियों को एक सहज इंटरफेस में एकीकृत करता है। जिससे उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर अपनी शिकायत दर्ज नहीं करवानी पड़ती है।

तमिलनाडु: खराब टेलीविजन के लिए 14,429 रुपये लौटाए गए

उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से टेलीविजन खरीदा था उसने काली रेखा और बेमेल सीरियल नंबर वाले खराब टेलीविजन के लिए धनवापसी की मांग की। आयोग ने पाया कि निर्माता सेवा में कमी के लिए जि‍म्मेदार है और उसने 14,249 रुपये (प्रतिदाय के रूप में), 5,000 रुपये (मानसिक पीड़ा के लिए) और 10,000 रुपये (मुकदमेबाजी के खर्च के लिए) का भुगतान करने का आदेश दिया।

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