नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में होने वाले छात्रसंघ चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, नॉर्थ कैंपस में चुनावी माहौल भी गर्माता जा रहा है। 18 सितंबर को होने वाले इन छात्रसंघ चुनावों के लिए छात्र संगठन उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ अपने-अपने मुद्दों और एजेंडे को लेकर कैंपस में सक्रिय हो गए हैं और चुनाव प्रचार में पूरी तरह जुट गए हैं।
NSUI का फोकस
कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), जो फिलहाल केंद्रीय पैनल पर काबिज है, सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। एनएसयूआई ने प्रवेश और भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी, जर्जर बुनियादी ढांचे और सीयूईटी (CUET) के कारण होने वाली देरी जैसे विषयों को अपने एजेंडे में शामिल किया है। हाल ही में NSUI ने महिला छात्रों के लिए प्रत्येक सेमेस्टर में 12 दिन मासिक धर्म अवकाश की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
ABVP की चिंता
RSS से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सत्र शुरू होते ही चुनाव प्रचार तेज कर दिया। उनका मुख्य फोकस DU प्रशासन द्वारा जारी की गई वह शर्त है जिसके तहत चुनाव लड़ने वाले छात्रों को ₹1 लाख का बॉन्ड भरना होगा। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो यह राशि ज़ब्त कर ली जाएगी। ABVP संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस बॉन्ड फैसले को वापस लिया जाएगा। इसके अलावा नए दिशा-निर्देशों में लाउडस्पीकर, वाहनों और दीवारों पर लिखाई जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है।
‘स्वच्छ राजनीति’ का विकल्प
आम आदमी पार्टी (AAP) का छात्र संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स’ (ASAP) इस बार एनएसयूआई-एबीवीपी के प्रभुत्व को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। ASAP का कहना है कि वे छात्रों को “पैसे और बाहुबल” वाली राजनीति के बजाय “स्वच्छ राजनीति” का विकल्प देंगे। वही ASAP ने छात्रों के लिए मेट्रो किराए में 50% छूट की भी मांग की है, ताकि शिक्षा और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को कम किया जा सके।
लेफ्ट संगठनों की तैयारी
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) इस चुनाव में गठबंधन पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत वैल्यू एडेड और स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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निष्कर्ष
जैसे-जैसे DUSU चुनाव की तारीख़ नज़दीक आ रही है, सभी प्रमुख छात्र संगठन अपने-अपने मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं। NSUI जहां सामाजिक न्याय और कॉलेज के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर ज़ोर दे रही है, वहीं ABVP बॉन्ड क्लॉज को हटाने की मांग कर रही है। दूसरी तरफ ASAP और लेफ्ट संगठन छात्रों के सामने “विकल्प की राजनीति” और शैक्षणिक सुधार के मुद्दे रख रहे हैं। ऐसे में यह देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि 18 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र किस संगठन को अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।



