पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला सशक्तिकरण नीतियों को सीधे मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए, महिला जदयू ने एक नया और व्यापक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, महिला जदयू की 40 टीमें राज्य भर में घर-घर जाकर सरकार की उपलब्धियों को लोगों को बताएंगी।
अभियान का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
यह विशेष अभियान, जिसका नाम ‘सुशासन का सार-आपके द्वार’ है, रविवार से शुरू होकर 23 अगस्त तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य नीतीश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए किए गए कामों को हर महिला मतदाता तक पहुंचाना है। पार्टी ने इसके लिए विशेष तैयारी की है। टीमों को बुकलेट, हैंडबिल और स्टिकर दिए गए हैं, जिनमें सरकार की प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों का विवरण है। इन सामग्रियों का उपयोग बूथ स्तर तक किया जाएगा ताकि कोई भी मतदाता जानकारी से वंचित न रहे।
नेताओं के बयान और चुनावी लक्ष्य
शनिवार को जदयू कार्यालय में आयोजित एक बैठक में इस अभियान की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, महिला जदयू की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. भारती मेहता और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उमेश सिंह कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए जो काम किए हैं, वह पूरे देश में एक मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि अब समय है कि इन उपलब्धियों को हर घर तक पहुंचाया जाए। विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन सर्राफ और मुख्य सचेतक संजय गांधी ने भी पार्टी के लक्ष्यों पर बात की। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य हर बूथ के प्रत्येक परिवार तक पहुंचना है। उन्होंने विश्वास जताया कि महिला नेत्रियों की ऊर्जा और समर्पण के बल पर, 2025 के चुनाव में 225 सीटों पर विजय का लक्ष्य निश्चित रूप से पूरा होगा। महिला जदयू की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. भारती मेहता ने भी ‘2025 में 225 और फिर से नीतीश’ के नारे को दोहराया और कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति तक उनका काम लगातार जारी रहेगा। यह अभियान स्पष्ट करता है कि जदयू आगामी चुनावों में महिला वोट बैंक को एक महत्वपूर्ण कारक मान रही है और इसी के अनुरूप अपनी रणनीति बना रही है।
2025 बिहार विधानसभा चुनाव
बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल, खासकर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठबंधन, इन चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं। यह अभियान उसी रणनीति का एक हिस्सा है।
नीतीश कुमार की महिला सशक्तिकरण नीतियां
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक यात्रा में महिला वोट बैंक पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं, जैसे:
- पंचायती राज और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण: इस कदम ने ग्रामीण और शहरी स्तर पर महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आने का अवसर दिया।
- पुलिस बल में 35% आरक्षण: बिहार देश का एकमात्र राज्य है जहाँ पुलिस में महिलाओं के लिए इतना बड़ा आरक्षण है।
- जीविका योजना: इस योजना ने लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया है।
- मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना: इसके तहत छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जिससे लड़कियों की शिक्षा दर में काफी वृद्धि हुई है।
ये सभी नीतियाँ नीतीश कुमार को “महिला-हितैषी नेता” के रूप में स्थापित करती हैं, और यह अभियान उन्हीं उपलब्धियों को भुनाने का प्रयास है।
- इसको भी पढ़ें: वोटर लिस्ट में ‘खेला’: दरभंगा में मिले 655 डुप्लीकेट वोटर
चुनावी रणनीति
JDU ने यह अभियान इसलिए शुरू किया है ताकि वे अपनी सरकार के कामों का संदेश सीधे बूथ स्तर और हर घर तक पहुंचा सकें। पार्टी का मानना है कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने का जो काम नीतीश कुमार ने किया है, वैसा उदाहरण किसी अन्य राज्य में नहीं मिलता। इस अभियान के जरिए वे महिला मतदाताओं को फिर से अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का लक्ष्य है कि इस चुनाव में वे 225 सीटों पर जीत हासिल करें, और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए महिला वोट बैंक को साधना उनकी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।



