नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी (Anderson-Tendulkar Trophy) में भारतीय बल्लेबाज करुण नायर (Karun Nair) ने आठ साल बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी की। लेकिन उनकी वापसी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। पांच मैचों की इस रोमांचक सीरीज (India vs England) में नायर ने कुल 205 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 25.62 का रहा। द ओवल मैदान पर खेले गए मुकाबले में उन्होंने 57 रन की पारी खेली, जो इस सीरीज में उनका एकमात्र अर्धशतक साबित हुआ। नायर का कहना है कि उन्हें ज्यादातर मैचों में अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वह उसे बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे।
अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलना चुनौती
करुण नायर (Karun Nair) ने सीरीज में मिली विफलता पर कहा, “ऐसा नहीं था कि मैं खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा था। मैं पूरे आत्मविश्वास से बल्लेबाजी कर रहा था और ज्यादातर मैचों में अच्छी शुरुआत भी मिली। लेकिन बात वहीं अटक रही थी—30 या 40 रन तक पहुंचकर आउट हो जाना। यह मेरे लिए किसी और से ज्यादा निराशाजनक था।” नायर का कहना है कि उन्होंने अपने प्रदर्शन पर विचार किया और कई अनुभवी लोगों से चर्चा की। उनके मुताबिक अब उनकी प्राथमिकता यह होगी कि वह जब भी अगली बार अच्छी शुरुआत करें, तो उसे शतक या बड़ी पारी में बदल सकें।
वापसी के बाद सीख और आत्ममंथन
नायर ने स्वीकार किया कि लंबे समय बाद टीम में लौटना उनके लिए खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि वह लगातार सोच रहे हैं कि आखिर वे क्यों बड़ी पारी तक नहीं पहुंच पाए। इसको लेकर उन्होंने विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों से सलाह ली है। नायर का मानना है कि तकनीकी और मानसिक मजबूती से ही इस कमी को दूर किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में वे अपनी गलतियों से सीख लेकर और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
टीम इंडिया का हिस्सा बनकर गर्व
करुण नायर इस बात से खुश हैं कि वह एक युवा और नई सोच वाली भारतीय टीम का हिस्सा बने, जिसने इंग्लैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में सीरीज को 2-2 की बराबरी पर समाप्त किया। उन्होंने कहा, “यह एक शानदार सीरीज थी और इसका हिस्सा बनना गर्व की बात है। बहुत कम टीमें इंग्लैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज को बराबरी पर खत्म कर पाई हैं। इसलिए मेरे लिए यह अनुभव अविस्मरणीय है।
तिहरा शतक जड़ने वाले गिने-चुने भारतीयों में शामिल
करुण नायर भारतीय क्रिकेट इतिहास में टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले केवल दूसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे हमेशा बड़ी पारियों की उम्मीद की जाती है। लेकिन इंग्लैंड दौरे पर उनकी वापसी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। फिर भी नायर का कहना है कि उन्होंने जो सीखा है, उससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है। आने वाले टूर्नामेंट्स में वह टीम इंडिया के लिए भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में खुद को साबित करना चाहते हैं।



