जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ऊर्जा दे रहा GCNEP

वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी से भारत जीरो कार्बन ऊत्सर्जन के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। इसमें दूसरे देशों की परमाणु एजेसियों के साथ आईएईए की भी अहम भूमिका है।

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नई दिल्ली: 2070 तक जीरो कार्बन एमिशंस के लक्ष्य को हासिल करने में वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी केंद्र (GCNEP) अहम किरदार निभा रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि यह केंद्र दूसरे देशों, एजेंसी और इंटरनेशनल आटमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के साथ साझेदारी बढ़ाने और भारत की क्षमता मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है।
परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के तत्वावधान में छठी अनुसंधान एवं विकास इकाई के रूप में वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी केंद्र (जीसीएनईपी) की स्थापना की गई है।

17 देशों से करार

केंद्र का प्रमुख क्षेत्र, सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य से मानव संसाधन विकास पर केंद्रित निरंतर कार्यक्रमों/बैठकों के माध्यम से भागीदार देशों/एजेंसियों के साथ सक्रिय जुड़ाव है। वर्तमान में जीसीएनईपी ने आईएईए सहित 17 अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों/देशों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं। इसके अंतर्गत जीसीएनईपी वर्ष 2017 से कई ऑन-कैंपस अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। अब तक राष्ट्रीय कार्यक्रमों सहित 100 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

विजन और मिशन

इस एजेंसी का विजन सुरक्षित, संरक्षित और सतत परमाणु ऊर्जा को वैश्विक साझेदारी के माध्यम से बढ़ावा देना। इसका उद्देश्य ऐसी परमाणु प्रणालियों का अनुसंधान, डिजाइन और विकास करना है जो सुरक्षित, संरक्षित, प्रसार-रोधी और टिकाऊ हों। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सामयिक मुद्दों पर प्रशिक्षण, सेमिनार, व्याख्यान और वर्कशॉप कराना है। सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी को बढ़ावा देना।

पांच स्कूल स्थापित करना

  • उन्नत परमाणु ऊर्जा प्रणाली अध्ययन
  • परमाणु सुरक्षा अध्ययन
  • विकिरण सुरक्षा अध्ययन
  • परमाणु पदार्थ अभिलक्षणन अध्ययन
  • स्वास्थ्य सेवा, कृषि और खाद्य में रेडियोआइसोटोप और विकिरण प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग

इनसे है साझेदारी

अफ्रीकन कमिशन ऑन न्यूक्लियर एनर्जी ( AFCONE), अर्जेंटिना, ASEAN Centre for Energy, बांग्लादेश, बुल्गारिया, फ्रांस, घाना, इंटरनेशनल अटोमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA), कजाकस्तान, पेरू, मलावी, रूसी संघ यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, उज़्बेकिस्तान वियतनाम।

भारत में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन

देश में कुल बिजली उत्पादन में से परमाणु ऊर्जा लगभग 3 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 1,830 बिलियन यूनिट बिजली उत्पादन के मुकाबले, परमाणु ऊर्जा का योगदान लगभग 56.7 बिलियन यूनिट (~ 3.1 प्रतिशत) होगा। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता तक पहुँचने के लिए एक परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की है।

वर्तमान में तमिलनाडु के कुडनकुलम में चार परमाणु ऊर्जा रिएक्टर – केकेएनपीपी 3 और 4 (2×1,000 मेगावाट) और केकेएनपीपी 5 और 6 (2×1,000 मेगावाट) निर्माणाधीन हैं। भाविनी तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट क्षमता का एक प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) परियोजना भी स्थापित कर रही है।

अटोमिक, मिनरल एंड मैनेजमेंट रिसर्च

परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की इकाई परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (Atomic, Mineral and Management Research) यूरेनियम, थोरियम, नियोबियम, टैंटलम, बेरिलियम, लिथियम, ज़िरकोनियम, टाइटेनियम और यूरेनियम व थोरियम युक्त दुर्लभ सोएल मिनर्ल्स के खनिज संसाधनों की पहचान और मूल्यांकन कर रहा है। संस्थान ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, मेघालय, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित 47 यूरेनियम भंडारों में 4,33,800 टन यूरेनियम ऑक्साइड U3O8 का इन-सीटू भंडार स्थापित किया है।

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