मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार के लोगों के लिए साइबर (Cyber) ठगी का नया और खतरनाक चेहरा सामने आया है। बीते तीन महीनों में तिरहुत और चंपारण रेंज में करीब दो करोड़ रुपये की ठगी ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब नई रणनीति अपना रहे हैं। अब स्थानीय ठगों के बजाय, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों से संचालित होने वाले गिरोह लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। ये अपराधी फिशिंग ऐप्स, क्लोन वेबसाइटों और फर्जी लिंक्स के जरिए लोगों को फंसाते हैं। इस तरह के अपराधों में लगातार हो रही वृद्धि ने न केवल पुलिस के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है, बल्कि आम जनता को भी अत्यधिक सतर्क रहने की चेतावनी दे रहा है, क्योंकि विदेशी नेटवर्क के कारण इन मामलों को सुलझाना बेहद जटिल हो गया है।
ठगी के मुख्य तरीके
फिशिंग वेबसाइट, शेयर ट्रेडिंग और यूपीआई ऐप्स हैं। ये विदेशी साइबर (Cyber) अपराधी लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
फिशिंग वेबसाइट
ये अपराधी मशहूर कंपनियों से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट्स बनाते हैं। खरौना स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षक दीपांशु कुमार को ‘rent.com‘ से मिलती-जुलती एक क्लोन वेबसाइट के जरिए 17.35 लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस की शुरुआती जांच में इस मामले के तार कंबोडिया से जुड़े होने के सबूत मिले हैं।
फिशिंग शेयर ट्रेडिंग ऐप्स
डॉ. अजय कुमार से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया गया और फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराकर 3.36 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में पुलिस को लाओस से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
फिशिंग यूपीआई ऐप्स
भगवानपुर के व्यवसायी संतोष कुमार को भी मोबीक्विक जैसे दिखने वाले एक फिशिंग ऐप से निशाना बनाया गया। इस ऐप को डाउनलोड करते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और उनके खाते से 5.63 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस मामले के तार भी विदेश से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।
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‘घोस्ट खातों’ में जा रहा पैसा, पुलिस की मुश्किलें बढ़ीं
साइबर ठगी के बाद पैसा जिन बैंक खातों में भेजा जा रहा है, उन्हें ‘घोस्ट खाते’ कहा जाता है। ये खाते राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और नोएडा जैसे राज्यों में फर्जी नामों या पहचान पर खोले गए हैं। इन खातों का ब्योरा निकालना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिससे अपराधियों का पता लगाना और भी मुश्किल हो जाता है।
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के मुताबिक, “फिशिंग ऐप्स, लिंक्स और वेबसाइट्स के जरिए होने वाली ठगी के ज्यादातर मामलों के तार विदेशी साइबर अपराधियों से जुड़े हैं, जिससे सुराग ढूंढना बहुत कठिन हो जाता है। हम बैंक खातों के जरिए जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।” यह स्थिति दर्शाती है कि साइबर अपराध का जाल अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी इसमें सक्रिय हो चुके हैं। आम जनता को इस तरह के फर्जी लिंक्स और ऐप्स से सावधान रहने की सख्त जरूरत है।



