जम्मू कश्मीर विशेष: 370 के खात्मे के छह साल, विकास ने पकड़ी रफ्तार

J&K का विशेष राज्य का दर्जा खत्म हुए छह साल होने को हैं। आइए, समझते हैं कि इस बीच राज्य में क्या बदला, कौन सी सहूलियत मिली और विकास की रफ्तार कैसी रही...

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नई दिल्ली: बात छह साल पहले की है। केंद्र सरकार ने एक झटके में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। आजादी के बाद से प्रदेश को जो विशेष दर्जा मिला था, वह नहीं बचा। दो विधान, दो निशान, दो प्रधान का चलन 5 अगस्त 2019 की सुबह निष्प्रभावी हो गया।
विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। उस वक्त बुलाई गई संसद में केंद्र ने अपने फैसले को मजबूती से रखा भी। यह लेख इस क्षेत्र के छह साल के सफर का आकलन है। और इसी से तय होगा कि केंद्र सरकार का फैसला आम लोगों के हक में रहा या नहीं….

भारत ने पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के लिए 24 सीट तय की
अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद नए सिरे से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों का परिसीमन हुआ। विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़ाकर 90 कर दी गई। वहीं, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के लिए भी 24 सीट सुरक्षित रखा गया। पहली बार यहां अनुसूचित जनजाति के लिए 9 सीट आरक्षित की गई है। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में 58.46% और विधानसभा चुनाव में 63% लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। इससे यकीन बना कि लोगों का भरोसा भारतीय संसदीय प्रणाली में बना हुआ है।

दुनिया का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज
रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में जम्मू-कश्मीर को दुनिया के मानचित्र पर सबसे अलग और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। इसी क्रम में चिनाब ब्रिज पर दुनिया का सबसे ऊंचा (359 मीटर) रेलवे पुल शुरू किया गया। 37,000 करोड़ रुपये की लागत से बारामुला से कटरा को जोड़ा गया। इस लाइन के शुरू होने से कश्मीर देश के बाकी हिस्सों से रेल लाइन से पूरी तरह से जुड़ गया। 

सड़कों पर सरपट वाहन दौड़ाने के लिए 61000 करोड़ से ज्यादा का निवेश
सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के और यहां के लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए 61000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। 8.45 किलोमीटर ट्विन ट्यूब काजीगुंड-बनिहाल सुरंग के निर्माण से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को अपग्रेड किया गया। अखनूर-पुंछ सड़क के दोहरीकरण का काम जारी है। आठ हजार किलोमीटर से अधिक सड़क और 302 पुलों का निर्माण पिछले चार वर्ष में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत किया गया है। 

हवाई यात्रियों की संख्या दोगुनी
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में बड़ी तेजी से बढ़ी है। इसका नतीजा यह हुआ है कि छह वर्ष से भी कम समय में यहां हवाई यात्रियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 850 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि से जम्मू एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही अब जम्मू और श्रीनगर में रात के समय में भी हवाई यात्रा संभव किया गया है। 

पर्यटकों को लुभाता गुलमर्ग

वादियों में लौटी रौनक
कश्मीर में निवेश को आकर्षित करने के लिए पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया और टूरिज्म और नई फिल्म नीति लागू की गई। सड़क से लेकर हवाई संपर्क बढ़ने से 2024 में 2.36 करोड़ से ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचे। इसमें 65 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए 1,989 होम स्टे पंजीकृत किए गए हैं। 

एक एम्स शुरू दूसरे पर काम जारी
जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये वाली स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए जम्मू के विजयपुर में एम्स की शुरुआत कर दी गई है जबकि 1,828 करोड़ रुपये की लागत से अवंतीपुरा में एम्स का निर्माण चल रहा है। 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज स्वीकृत गए, 100-100 बिस्तर वाले बालटाल और चंदनवारी में डीआरडीओ द्वारा अस्पताल का निर्माण,  दो कैंसर संस्थान, 49 बीएससी नर्सिंग कॉलेज और 19 बीएससी पैरामेडिकल कॉलेज, नर्सिंग में 2,305 और पैरामेडिकल में 1,690 सीट जोड़ी गई। 800 एमबीबीएस सीट, 297 पीजी सीटें और 372 डीएनबी सीट जोड़ी गई।

स्कूली शिक्षा से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग तक फोकस
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पूरी तरह से लागू कर दी गई है। पिछले छह वर्ष में 3 इंजीनियरिंग कॉलेज सहित 51 नए कॉलेज, 600 अतिरिक्त पॉलिटेक्निक सीट, 396 स्कूलों को पीएम श्री योजना के तहत चरण-I, II और III में अपग्रेडेशन, 46,000 बच्चे जो स्कूल से बाहर थे उन्हें मुख्यधारा में लाया गया। साथ ही 9वीं से 12वीं तक के 1.21 लाख छात्रों को व्यावसायिक पाठ्यक्रम में पंजीकृत किया गया।

जम्मू कश्मीर का राजभवन

रोशन हो रहा जम्मू-कश्मीर
जम्मू से लेकर कश्मीर घाटी तक रौशन के लिए बड़े पैमाने पर पावर प्लांट लगाए गए हैं और अब वहां से बिजली उत्पादन भी होने लगा है। 5,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य अगले पांच वर्ष में रखा गया है। 3,014 मेगावाट क्षमता की चार मेगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट 2026 तक पूरा होने की उम्मीद साथ ही 1,600 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए भी समझौता किया गया है। 38 ग्रिड स्टेशन, 266 सब-स्टेशन के निर्माण के साथ-साथ 467 किमी नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई। 11 हजार सर्किट किमी की नई हाई और लो टेंशन लाइन बिछाई गई, 9 हजार विद्युत वितरण ट्रांसफर, 194 विद्युत वितरण परियोजना और 28 ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट का काम पूरा किया गया। 

सिंचाई की व्यवस्था और किसानों की आय बढ़ी
बाढ़ प्रबंधन योजना के साथ-साथ किसानों को फसलों की सिंचाई के साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य रावी नहर का काम पूरा किया गया और झेलम एवं सहायक नदियों के लिए बाढ़ प्रबंधन की योजना तैयार की गई। तवी बैराज प्रोजेक्ट को 8 वर्ष बाद दोबारा शुरू किया गया। 1979 से लंबित मुद्दे को समाप्त किया गया रावी नदी से जम्मू-कश्मीर को पानी मिलने का रास्ता साफ हुआ। त्राल लिफ्ट सिंचाई योजना का काम पूरा हुआ इससे 5,122 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई व्यवस्था की गई। किसान सम्मान निधि के तहत करीब 13 किसानों के बैंक खातों में 3,676 करोड़ रुपये जमा कराए गए। पीएम फसल बीमा योजना का विस्तार सभी जिलों तक किया गया। 

करीब 20 लाख घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य
सभी को पीने का स्वच्छ पानी मिले इसके लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। यहां 19.27 लाख ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें 15.60 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन दे दिया गया है। वर्ष 2019 से पहले यहां महज 5.78 लाख नल जल कनेक्शन था। 

शहर में ग्रीन ट्रांसपोर्ट और पक्के मकान
प्रदूषणमुक्त यातायात व्यवस्था बनाने के लिए 200 ई-बस शुरू की गई है जबकि बहुत जल्द 200 अतिरिक्त ई-बस सेवा जल्द ही सड़कों पर दौड़ेगी। 47,040 घरों को प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) के तहत मंजूरी, 30,700 घरों का निर्माण पूरा।   

उद्योग धंधों को मिली रफ्तार
जम्मू-कश्मीर में उद्योग-धंधों का मजबूत आधार बनाने के लिए कई तरह की नीतियां तैयार की गई हैं। जम्मू-कश्मीर औद्योगिक नीति (2021-30), भूमि आवंटन नीति (2021-30), निजी औद्योगिक संपदा विकास नीति (2021-30) और नई स्टार्टअप नीति (2024-27)। 1,030 स्टार्टअप डीपीआईआईटी के साथ पंजीकृत जिसमें 380 का नेतृत्व महिला कर रही हैं। उद्योग को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 46 नए औद्योगिक एस्टेट विकसित किए जा रहे हैं। 1,63,831 करोड़ रु. के प्रस्तावित निवेश से 5.89 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद। 

रोजगार मिलने से साकार हो रहे सपने
युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और ऐसी शिक्षा दी जा रही है जिससे हर हाथ को काम मिल सके। वर्ष 2021-22 से 7.66 लाख स्वरोजगार/आजीविका के अवसर सृजित किए गए हैं। 39,466 लोग का चयन वर्ष 2019 से अब तक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी के लिए किया गया। 10 हजार से अधिक और नए पद पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब सात हजार पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर में हुए बदलाव को ऐसे समझिए
आतंकी घटनाओं में तो कमी आई ही है, पत्थरबाजी और पाक प्रायोजित हड़ताल में शत-प्रतिशत की कमी रिकॉर्ड की गई है। वर्ष 2024 में आतंकवादी घटनाओं की संख्या 27 थी, जबकि 2018 में यह संख्या 228 थी। 2024 में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या 31 थी तो वर्ष 2018 में 91 थी। 2024 में आतंकवादी घटनाओं और मुठभेड़ में 26 नागरिक मारे गए जबकि वर्ष 2018 में यह संख्या 55 थी।

लद्दाख की खूबसूरत और लोकप्रिय पेंगोंग झील, इसे पेंगोंग त्सो भी कहा जाता है

लद्दाख को मिली नई रफ्तार
केंद्र शासित प्रदेश बनने के पहले जम्मू-कश्मीर का शासन लद्दाख के साथ न्याय नहीं करता था इस तरह के आरोप वहां के लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई थी। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद न सिर्फ लद्दाख का तेजी से विकास हुआ बल्कि बड़ी उसे उसके हक की पूरी राशि मिलने लगी।

  • लेह में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 50 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र का निर्माण कार्य शुरू।
  • केंद्र शासित लद्दाख द्वारा ई-वाहन नीति अधिसूचित की गई।
  • करीब 20 हजार सोलर वाटर हीटर वितरित किए गए।
  • लद्दाख के सूखाग्रस्त इलाके के लिए 72 सौर लिफ्ट सिंचाई पंप की स्थापना।
  • कारगिल में 170 बिस्तर वाले अस्पताल का निर्माण कराया गया।
  • यहां की 100% आबादी आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत कवर।
  • लेह में मेडिकल और कारगिल में इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करने का प्रस्ताव।
  • उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 24 अटल टिंकरिंग और रोबोटिक लैब की स्थापना।
  • औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 25 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी के साथ सिंधु इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की स्थापना।
  • 640 करोड़ रु. की लागत से लेह में आधुनिक एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है।
  • लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद 309 मोबाइल टावर की स्थापना।
  • 550 किलोवाट क्षमता की मिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट की स्थापना।
  • 60,793 स्मार्ट बिजली मीटर लगाए गए।
  • 1,000 मीट्रिक टन क्षमता की कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था।

(स्रोत: पीआईबी, केंद्र व जम्मू कश्मीर सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से आंकड़े लिए गए हैं।)

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