पटना: बिहार के प्रतिष्ठित रिसर्च संस्थान अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज में जल्द ही तीन नए रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, शिक्षकों के 46 नए पदों के सृजन को भी संस्थान के बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। इस बैठक की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने की।
तीन नए रिसर्च सेंटर और उनकी उपयोगिता
ये तीन नए रिसर्च सेंटर समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होंगे
1. सेंटर फॉर डिसएबिलिटी एंड री-हैबिलेटेशन स्टडीज: यह दिव्यांगजनों की सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का अध्ययन करेगा।
2.सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गर्वनेंस एंड प्लानिंग: यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाने में मदद करेगा।
3.सेंटर फॉर सोशल एक्सक्लूजन एंड इन्क्लूसिव पॉलिसी: इसका उद्देश्य समाज के हाशिये पर चल रहे वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।
6 पदों को मिली मंजूरी, 20 नए पद सृजित
संस्थान के बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक में पुराने पदों को खत्म करते हुए कुल 46 नए पदों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 20 नए पद सृजित किए गए हैं, जबकि 26 पद पहले से थे। हालांकि, इनमें से केवल 9 पद ही भरे हुए हैं। नए पदों में 5-5 पद प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के हैं, जबकि 10 पद असिस्टेंट प्रोफेसर के हैं। तीनों नए रिसर्च सेंटरों में अध्यापकों के 4-4 (कुल 12) पद सृजित किए गए हैं।
गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए 60 पदों पर भी होंगी भर्तियां
संस्थान में गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए 60 अन्य पदों पर भी नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरा जाएगा। इसके अलावा, पहले से चल रहे रिसर्च विंग जैसे सेंटर फॉर नन वायलेंस एंड पीस और सेंटर फॉर सोशल ज्योग्राफी में भी एक-एक शिक्षक के पद को मंजूरी मिली है।
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पीएचडी की फीस हुई तय
संस्थान में पहली बार पीएचडी की फीस तय की गई है। एप्लीकेशन फीस 500 रुपये रखी गई है, जो आरक्षित श्रेणी और महिलाओं के लिए 250 रुपये होगी। पीएचडी कोर्स वर्क की फीस 2000 रुपये तय की गई है, जो अन्य संस्थानों की तुलना में बहुत कम है।



