हर घर पहुंच रहा शुद्ध पानी, सरकार का अभियान लाया रंग

जल जीवन मिशन प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रदूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों से भी बचा रहा है। हर घर जल अभियान रंग ला रहा है।

Share This Article:

नई दिल्ली: जल जीवन मिशन (जेजेएम)-हर घर जल अभियान रंग ला रहा है। अब देश की अधिक्तर आबादी को शुद्ध पानी पीने के लिए मिल रहा है। अब उनके पानी में फ्लोराइड या रासायनिक तत्व कम होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। 2019 में शुरू हुए इस अभियान के तहत पौने सात हजार उन बस्तियों या गांवों को शुद्ध पानी मिलने लगा है, जहां के पानी में पहले फ्लोराइड या अन्य हानिकारक कैमिकल होते थे। यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने राज्यसभा में दी।

फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों की संख्या

सालबस्तियां
20197,996
2020 5,796
2021 1,021
2022 638
2023 393
2024 348
2025 250
1 अप्रैल से 25 जुलाई 2025248

(स्रोतः जेजेएम-आईएमआईएस)

ऐसे आया सुधार 
2019 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त, गुणवत्ता पूर्ण और नियमित एवं दीर्घकालिक आधार पर नल द्वारा पीने योग्य पानी की आपूर्ति के लिए यह अभियान शुरू हुआ था। पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के बीआईएस:10500 मानक के पाइप से जलापूर्ति की जाती है। इसकी जिम्मेदारी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के पास है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
प्रदेशों को विशेष रूप से आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) स्थापित करने की सलाह दी गई है। प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार, देश में अभी 248 फ्लोराइड प्रभावित ग्रामीण बस्तियां हैं जहां जेजेएम मानकों के अनुरूप पाइप जलापूर्ति योजनाएं आरंभ नहीं हुई हैं। हालांकि, इन सभी 248 बस्तियों को सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों/व्यक्तिगत घरेलू शोधक (सीडब्ल्यूपीपी/आईएचपी) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रति दिन 8-10 लीटर पीने और खाना पकाने के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया गया है।

कितना खतरनाक है फ्लोराइड 
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, भारत सरकार फ्लोरोसिस की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीएफ) लागू कर रही है। फ्लोरोसिस बीमारी अत्यधिक फ्लोराइड युक्त भोजन और पानी के सेवन से होती है। जून 2025 तक 163 जिलों में लागू किया जा रहा है। इसके तहत कई पहल किए जाएंगे। जैसे-

  • परामर्शदाता, प्रयोगशाला तकनीशियन और क्षेत्र अन्वेषक की व्यवस्था करके प्रभावित जिलों में जनशक्ति को मजबूत करना;
  • प्रयोगशाला के लिए उपकरणों की खरीद, जिसमें जल के लिए आयन मीटर और फ्लोराइड स्तर के मूत्र विश्लेषण उपकरण शामिल हैं;
  • विभिन्न स्तरों पर चिकित्सा एवं पैरामेडिकल कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण;
  • स्वास्थ्य शिक्षा और प्रचार;
  • विटामिन और खनिज युक्त पूरकता और पुनर्निर्माण सर्जरी और पुनर्वास सहित उपचार।
  • फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों और स्थापित सीडब्ल्यूपीपी/आईएचपी की संख्या

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.