नई दिल्ली: वर्ष 2014 से 2016 के बीच वैश्विक महासागरों, विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट पर अब तक की सबसे लंबी और तीव्र समुद्री हीटवेव दर्ज की गई। इस दौरान समुद्री तापमान सामान्य से 2 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। कनाडा की विक्टोरिया विश्वविद्यालय की बॉम लैब के शोधकर्ताओं ने 300 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों और सरकारी दस्तावेजों का विश्लेषण कर इस हीटवेव के पारिस्थितिक प्रभावों का गहन अध्ययन किया। इस पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने प्रभाव डाला है।
समुद्री जीवन पर गहरा असर
शोध में पाया गया कि इस असामान्य गर्मी ने उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर हजारों किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र में पारिस्थितिक असंतुलन पैदा किया। कई समुद्री प्रजातियां अपने सामान्य निवास स्थानों से सैकड़ों किलोमीटर दूर, विशेष रूप से उत्तरी क्षेत्रों में, पाई गईं। उदाहरण के लिए, उत्तरी राइट व्हेल डॉल्फिन और समुद्री स्लग जैसी प्रजातियां अपने मूल आवास से 1,000 किलोमीटर तक उत्तर की ओर खिसक गईं। यह स्थानांतरण समुद्री तापमान में वृद्धि का स्पष्ट संकेत है, जो समुद्री जीवन को पूरी तरह बदल सकता है।
पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश
हीटवेव के कारण केल्प जंगल और समुद्री घास के मैदान बड़े पैमाने पर नष्ट हो गए। समुद्री तारों से लेकर समुद्री पक्षियों तक, कई प्रजातियों की आबादी में भारी कमी आई। कुछ प्रजातियां, जैसे चट्टानी तटों का प्रमुख शिकारी पिक्नोपोडिया हेलियनथोइड्स, विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गईं। तापमान से संबंधित बीमारियों, जैसे समुद्री तारा क्षय रोग ने पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक नुकसान पहुंचाया। इसने प्लवक से लेकर व्हेल तक, समुद्री खाद्य श्रृंखला के हर स्तर को प्रभावित किया।
खाद्य श्रृंखला और आर्थिक नुकसान
मछलियों की घटती संख्या और उनके पोषण मूल्य में कमी ने शिकारी प्रजातियों के लिए संकट पैदा किया। प्लवक समुदायों में बदलाव और समुद्री उत्पादकता में कमी ने पारिस्थितिकी तंत्र को और जटिल बना दिया। इस गर्मी का आर्थिक प्रभाव भी गंभीर रहा। प्रजातियों के आपसी संबंधों में बदलाव, बीमारियों का प्रसार, और आवास का नुकसान कई मछली पालन उद्योगों के लिए विनाशकारी साबित हुआ, जिससे अरबों रुपये का नुकसान हुआ।
भविष्य के लिए चेतावनी
‘ओशनोग्राफी एंड मरीन बायोलॉजी: एन एनुअल रिव्यू’ में प्रकाशित यह शोध दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री हीटवेव की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। 2014-16 की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गहराई से प्रभावित कर रहा है। शोधकर्ताओं ने सक्रिय संरक्षण रणनीतियों और जलवायु परिवर्तन को कम करने के उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि भविष्य में समुद्री जीवन को बचाया जा सके।



