International Tiger Day: पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक बाघों की रक्षा

भारत में रॉयल बंगाल टाइगर राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। 2022 की बाघ गणना के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है, जो 2018 की गणना (2,967) की तुलना में 24% अधिक है।

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नई दिल्ली: हर साल 29 जुलाई को विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है, जो प्रकृति के शक्तिशाली और आकर्षक प्राणी, बाघ, के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। अनुमानित 5,000 से भी कम जंगली बाघों के साथ, यह दिन हमें उनके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता की याद दिलाता है। अवैध शिकार, आवास विनाश और मानव-वन्यजीव संघर्ष ने बाघों की आबादी को पिछले एक सदी में 95% से अधिक कम कर दिया है। एक समय पूरे एशिया में फैले ये शानदार जीव अब केवल चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों तक सीमित हैं।

बाघों का पारिस्थितिक महत्व
बाघ न केवल अपनी सुंदरता और ताकत के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि एक प्रमुख प्रजाति के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे शिकार प्रजातियों की आबादी को नियंत्रित करके जंगलों की जैव विविधता को संरक्षित करते हैं, जिससे वनस्पतियों और अन्य जीवों का संरक्षण होता है। बाघों से समृद्ध जंगल जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करते हैं, क्योंकि ये कार्बन भंडारण और जल सुरक्षा में योगदान देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की स्थापना 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग बाघ सम्मेलन में हुई, जब वैश्विक बाघ आबादी घटकर लगभग 3,000 रह गई थी। इस सम्मेलन में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मलेशिया और रूस सहित 13 बाघ-क्षेत्रीय देशों ने हिस्सा लिया। इस दौरान TX2 लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसका उद्देश्य 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करना था। तब से यह दिन बाघ संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग का प्रतीक बन गया है।

2025 की थीम: समुदायों के साथ संरक्षण
2025 का अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मूल निवासियों और स्थानीय समुदायों के साथ बाघों के भविष्य को सुरक्षित करना थीम पर केंद्रित है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है, जब इसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी और नेतृत्व हो। ये समुदाय, जो बाघों के आवासों के सबसे करीब रहते हैं, संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वैश्विक संरक्षण प्रयास
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने 2014 से एकीकृत बाघ आवास संरक्षण कार्यक्रम (ITHCP) शुरू किया है, जिसमें भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों में 33 परियोजनाओं के लिए 47.5 मिलियन यूरो का निवेश किया गया है। इस कार्यक्रम ने 2015 से 2022 के बीच बाघों की आबादी में लगभग 40% की वृद्धि में योगदान दिया।
इसके तहत 10,500 हेक्टेयर बाघ आवास को पुनर्स्थापित किया गया और 5 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए। इसके अलावा, 95,000 से अधिक लोग, जिनमें आधे से ज्यादा महिलाएं हैं, इस कार्यक्रम से लाभान्वित हुए हैं। 10,000 से अधिक लोगों को बाघ आवास प्रबंधन और कानून प्रवर्तन के लिए प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही, 6.75 लाख लोगों तक जागरूकता अभियानों के माध्यम से पहुंच बनाई गई है, जो मानव-बाघ सह-अस्तित्व को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत में बाघ संरक्षण
भारत में रॉयल बंगाल टाइगर राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। 2022 की बाघ गणना के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है, जो 2018 की गणना (2,967) की तुलना में 24% अधिक है। मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद कर्नाटक (563) और उत्तराखंड (560) का स्थान है। भारत ने बाघ संरक्षण के लिए कई अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किए हैं, जो बाघों और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भविष्य के लिए कदम
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2025 हमें यह याद दिलाता है कि बाघों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा नहीं, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का प्रयास है। समुदाय-आधारित संरक्षण, जागरूकता और वैश्विक सहयोग के माध्यम से, हम बाघों और उनके आवासों को बचा सकते हैं।

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