नई दिल्ली: पानी पर चलने वाला रोबोट: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो पानी की सतह पर सॉफ्ट रोबोट्स बनाने की राह खोलती है। इस नई तकनीक, जिसे HydroSpread नाम दिया गया है, ने रोबोटिक्स, हेल्थकेयर और पर्यावरण निगरानी के क्षेत्र में क्रांतिकारी संभावनाएं पेश की हैं। यह तकनीक पानी पर तैरने वाले छोटे-छोटे रोबोट्स को जन्म देती है, जो बिल्कुल पानी पर चलने वाले कीटों की तरह गतिशील हैं। ये रोबोट भविष्य में प्रदूषण निगरानी, बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सर्वेक्षण और सैंपल संग्रह जैसे कार्यों को आसान बना सकते हैं।
HydroSpread का जादू
पारंपरिक तरीकों में सॉफ्ट रोबोट्स की पतली परतें ठोस सतहों पर बनाई जाती थीं, जिन्हें बाद में पानी पर स्थानांतरित करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में परतें अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती थीं। HydroSpread ने इस समस्या का समाधान कर दिया है। इसमें तरल सतह को ही निर्माण का आधार बनाया जाता है। पॉलिमर की छोटी बूंदें स्वतः फैलकर पतली, एकसमान परतें बनाती हैं। फिर, लेजर बीम की मदद से इन परतों को सटीक आकारों, जैसे गोलाकार, पट्टियों या जटिल डिजाइनों में काटा जाता है। यह प्रक्रिया न केवल तेज है, बल्कि त्रुटियों को भी कम करती है।
पानी पर दौड़ते रोबोट्स
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के प्रोफेसर बाओक्सिंग जू और उनकी टीम ने इस तकनीक से दो प्रोटोटाइप बनाए हैं। पहला, Hydro Flexor, जो पंखों जैसी गति से पानी पर तैरता है और दूसरा, Hydro Buckler, जो कीटों की तरह पैर मोड़कर चलता है। इन रोबोट्स को प्रयोगशाला में इन्फ्रारेड हीट से नियंत्रित किया गया। गर्मी से उनकी संरचना में बदलाव होता है, जिससे वे गति करते हैं। भविष्य में इन्हें सूर्य प्रकाश, चुंबकीय क्षेत्र या छोटे हीटरों से नियंत्रित करने की योजना है, ताकि ये पूरी तरह स्वायत्त हो सकें।
भविष्य की संभावनाएं
प्रोफेसर जू का कहना है कि तरल सतह पर निर्माण से सटीक और दोषरहित परिणाम मिलते हैं। यह तकनीक सॉफ्ट रोबोट्स के अलावा वेयरेबल मेडिकल सेंसर, लचीले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पर्यावरण निगरानी के लिए हल्के, टिकाऊ उपकरण बनाने में उपयोगी हो सकती है। यह खोज न केवल तकनीकी क्षेत्र में, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़े बदलाव लाने का वादा करती है।



