नई दिल्ली: वोक्सवैगन की प्रीमियम SUV, टॉरेग, अपने 24 साल के शानदार सफर को अलविदा कहने जा रही है। जर्मन ऑटोमोबाइल दिग्गज ने इस प्रतिष्ठित वाहन को 2026 के अंत तक बंद करने का फैसला किया है। 2002 में शुरू हुआ टॉरेग का उत्पादन, वोक्सवैगन, पोर्श और ऑडी के सहयोग का परिणाम था, जिसने कायेन और क्यू7 जैसी गाड़ियों को जन्म दिया। यह एसयूवी अपने समय में ब्रांड की लक्जरी सेगमेंट में पहचान थी, जिसने प्रीमियम डिजाइन और दमदार परफॉर्मेंस से बाजार में अपनी जगह बनाई।
फीचर्स
टॉरेग ने अपनी शुरुआत में बाजार को प्रभावित किया। इसका 5.0-लीटर V10 डीजल इंजन 850Nm टॉर्क के साथ दमदार था, जबकि 6.0-लीटर W12 पेट्रोल इंजन 450bhp की ताकत देता था। ये इंजन इसकी मजबूत उपस्थिति का प्रतीक थे। हालांकि, समय के साथ इसकी बिक्री में कमी आई, खासकर अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में, जहां 2017 के बाद इसे एटलस मॉडल से बदल दिया गया। कंपनी ने अब किफायती मॉडलों पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन यूरोप में बड़ी एसयूवी चाहने वालों के लिए टायरॉन को पेश किया, जो टिगुआन से प्रेरित है और दो या तीन पंक्ति सीटों के विकल्प के साथ उपलब्ध है।
नई एसयूवी लगी जगह
भारत में भी टॉरेग की जगह अब नई फ्लैगशिप एसयूवी, टायरॉन, लेने वाली है, जिसके 2025 के अंत तक लॉन्च होने की उम्मीद है। यह नया मॉडल आधुनिक तकनीक और डिजाइन के साथ बाजार में उतरेगा, जो वोक्सवैगन के बदलते रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। टॉरेग ने अपने दौर में लक्जरी और परफॉर्मेंस का मानक स्थापित किया, लेकिन अब कंपनी नए युग की मांगों के अनुरूप बदलाव कर रही है। टॉरेग के प्रशंसकों के लिए यह विदाई भावुक पल है, लेकिन टायरॉन के साथ वोक्सवैगन का भविष्य उज्ज्वल दिखता है।



