नई दिल्ली: सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है, लेकिन आखिरी में भारी नुकसान हो जाता है। हम बात कर रहे हैं कि सब्जी, अनाज और फलों की खेती करने वाले किसानों के दर्द की। हर साल देश के किसान धूप, गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड में कड़ी मेहनत करके फसल उगाते हैं। फसलों को खाद-पानी देने में अपनी जमा पूंजी लगाते हैं। जब बेचने की बारी आती है तो अक्सर अलग अलग वजहों से उन्हें नुकासान उठाना पड़ता है। कभी-कभी तो पूरी फसल ही चौपट हो जाती है। मसलन गर्मी के मौसम में गेहूं, सरसों, जौ की फसल में आग लग जाना। बारिश में धान की फसल भीग कर सड़ जाना। अब देश के किसानों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने इस नुकसान को रोकने के लिए कवायद शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (ministry of food processing industries) ने नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (नैबकॉन्स) के माध्यम से वर्ष 2020-22 के संदर्भ में 2022 में 292 जिलों में विभिन्न श्रेणियों के 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 54 वस्तुओं के फसलोपरांत (हर्वेस्टिंग के बाद) नुकसान का आकलन करने के लिए अध्ययन किया था। इन वजहों के सामने आने के बाद सरकार ने हार्वेस्टिंग के बाद किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रोसेस शुरू कर दिया है। इसके लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
समेकित बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच): फलों और सब्जियों में अपव्यय को कम करने के लिए कोल्ड स्टोरेज, राईपनिंग चैंबर और पैक हाउस सहित फसलोपरांत प्रबंधन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सहायता प्रदान करता है।
एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ): भंडारण, शीतगृहों और प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों सहित व्यवहार्य फसलोपरांत प्रबंधन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए मध्यम से दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण प्रदान करता है।
एग्रीकल्चर मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) स्कीम: आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने और बाजार स्तर पर फसलोपरांत नुकसान कोकम करने के लिए भंडारण और विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सहायता करती है।
राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम): बेहतर बाजार पहुंच और बेहतर मूल्य प्राप्ति में सहयोग देता है, और अधिक कुशल आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से पारगमन नुकसान को कम करता है।
इसके अतिरिक्त सरकार एकत्रीकरण, प्राथमिक प्रसंस्करण और बाजार संपर्कों को सुविधाजनक बनाने के लिए 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन को सक्रिय रूप से बढ़ावा देती है।
मंत्रालय ने नुकसान में कमी लाने, मूल्य संवर्धन बढ़ाने आदि सहित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फसलोपरांत इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रसंस्करण सुविधाओं के निर्माण के लिए वर्ष 2016-17 से केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक स्कीम-प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) को कार्यान्वित कर रहा है।
सबसे ज्यादा नुकसान फलों का
| फसलें | वस्तुएं नुकसान (%) |
| दलहन | 5.65-6.74 |
| अनाज | 3.89-5.92 |
| अंडा | 6.03 |
| कुक्कुट पालन | 5.63 |
| मांस | 2.34 |
| मत्स्य पालन (मरीन) | 8.76 |
| मत्स्य पालन (इनलैंड) | 4.86 |
| दूध | 0.87 |
| बागान फसलें और मसाले | 1.29-7.33 |
| सब्जियां | 4.87-11.61 |
| फल | 6.02-15.05 |
| तिलहन | 2.87-7.51 |



