नासा की नई तस्वीरों में चमका 3I/ATLAS धूमकेतु

साल 2024 की जुलाई महीने में चिली के ऊंचे पहाड़ों पर बनी एटलास (एस्टेरॉयड टेरेस्ट्रियल-इम्पैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम) दूरबीन ने पहली बार इस धूमकेतु को स्पॉट किया।

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नई दिल्ली: अंतरिक्ष की गहराइयों से आया एक रहस्यमयी यात्री इन दिनों वैज्ञानिकों और उत्साही लोगों की जुबान पर छाया हुआ है। नासा ने हाल ही में जारी की गई हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों में 3I/ATLAS नामक इस अंतरतारकीय धूमकेतु को कैद किया है, जो हमारे सौरमंडल को सिर्फ छूकर आगे बढ़ गया। क्या यह धूमकेतु वाकई किसी दूर के तारे की यादें लेकर आया है? या फिर यह ब्रह्मांड की सामान्य यात्रा का एक हिस्सा मात्र? इन सवालों ने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

पहली नजर में कैसे पकड़ा गया यह ‘विदेशी’ मेहमान?

साल 2024 की जुलाई महीने में चिली के ऊंचे पहाड़ों पर बनी एटलास (एस्टेरॉयड टेरेस्ट्रियल-इम्पैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम) दूरबीन ने पहली बार इस धूमकेतु को स्पॉट किया। शुरू में यह एक मामूली चमक की तरह लगा, लेकिन जैसे-जैसे डेटा आया, वैज्ञानिक हैरान रह गए। इसकी कक्षा बिल्कुल असामान्य थी, न तो यह हमारे सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा रही थी, बल्कि सीधी रेखा में घुसा और फिर बाहर निकल गया। मतलब साफ था: यह सौरमंडल का मूल निवासी नहीं, बल्कि किसी अन्य तारामंडल से भटका हुआ आगंतुक।

ऐसी अंतरतारकीय चीजें ढूंढना आसान नहीं। अब तक तो सिर्फ दो ही ऐसी वस्तुएं हमारे सिस्टम में दर्ज हो चुकी थीं:

1I/’Oumuamua (2017 में खोजी गई, सिगार के आकार वाली रहस्यमयी चीज)

2I/Borisov (2019 में दिखी, एक सच्चा धूमकेतु जैसी)

अब 3I/ATLAS ने तीसरा स्थान हासिल कर लिया। ये आगंतुक हमें बताते हैं कि ब्रह्मांड कितना विस्तृत और जुड़ा हुआ है – शायद कहीं दूर की दुनिया से आई सामग्री हमारे द्वार पर दस्तक दे रही हो।

तस्वीरों में छिपा है धूमकेतु का राज: बर्फ, धूल और चमकदार पूंछ

धूमकेतु क्या होते हैं, यह तो हम जानते हैं कि बर्फीले गोले जो सूर्य की गर्मी से पिघलते हैं और गैस-धूल की लंबी पूंछ बना लेते हैं। लेकिन 3I/ATLAS की नई तस्वीरें कुछ खास लाई हैं। नासा के मंगल मिशनों जैसे मंगल रिकॉनेसेंस ऑर्बिटर और मास्टकैम-जेड कैमरों से ली गई इन इमेजेस में धूमकेतु थोड़ा धुंधला सा दिखता है, लेकिन उसकी कोमा (चमकदार बादल) और धूल भरी पूंछ साफ नजर आ रही है। इससे साबित होता है कि यह बिल्कुल सामान्य धूमकेतु की तरह बर्ताव कर रहा, कोई जादू-टोना नहीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन तस्वीरों से हमें अन्य तारों के आसपास की परिस्थितियों का आईना मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, इसकी संरचना से पता चल सकता है कि दूर के सिस्टम में कितनी बर्फ और चट्टानें मौजूद हैं। नासा की इमेज गैलरी में ये तस्वीरें उपलब्ध हैं, जो किसी भी स्पेस लवर के लिए देखने लायक हैं।

एलियन सभ्यता का दावा? नासा ने लगाई मुहर – ‘सिर्फ प्राकृतिक चमत्कार’

इस धूमकेतु ने सुर्खियां बटोरीं तो इसलिए भी, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों ने इसे एलियन टेक्नोलॉजी बताने की कोशिश की। हार्वर्ड के खगोलशास्त्री अवी लोब जैसे नामी वैज्ञानिक ने इसकी कक्षा और जेट्स (गैस के फव्वारे) को देखकर सवाल उठाए, कहीं यह कृत्रिम न हो? लेकिन नासा ने साफ शब्दों में खारिज कर दिया। एजेंसी के बयान के मुताबिक, यह एक शुद्ध धूमकेतु है कि दिखता वैसा ही, चलता वैसा ही। कोई तकनीकी संकेत नहीं मिला।” नासा ने जोर देकर कहा कि उनका फोकस जीवन की तलाश पर है, जैसे मंगल पर रोवर्स द्वारा मिले प्राचीन माइक्रोबायल ट्रेस। लेकिन 3I/ATLAS? यह तो बस ब्रह्मांड का एक दोस्ताना पड़ोसी है, जो हमें अपनी यात्रा की कहानी सुना गया।

पृथ्वी को कोई खतरा नहीं: 27 करोड़ किमी दूर से गुजरा ‘ट्रैवलर’

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह धूमकेतु हमारी धरती के लिए बिल्कुल हानिरहित है। इसका सबसे करीब आना पृथ्वी से करीब 27.5 करोड़ किलोमीटर दूर हुआ, जो चंद्रमा से भी कहीं ज्यादा दूरी है। हवाई यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर में यह सूर्य के सबसे पास पहुंचा था। अब यह सौरमंडल के किनारे की ओर लौट रहा है, अपनी लंबी अंतरतारकीय सैर पर।

क्यों है यह खोज इतनी खास? ब्रह्मांड की जिज्ञासा जगाती एक झलक

3I/ATLAS जैसी खोजें हमें याद दिलाती हैं कि हमारा सौरमंडल कोई बंद कमरा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का एक व्यस्त हाईवे है। ये वस्तुएं न सिर्फ वैज्ञानिकों को नई थ्योरीज देने का मौका देती हैं, बल्कि आम लोगों में भी स्पेस के प्रति रुचि जगाती हैं। नासा की ये तस्वीरें देखकर लगता है, जैसे ब्रह्मांड हमें आमंत्रित कर रहा हो।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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