पटना: बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार का रविवार थम गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 के बिहार विधानसभा के चुनाव में 2020 की तुलना में अधिक समय दिया है। वर्ष 2020 के चुनाव में प्रधानमंत्री चार बार बिहार आए थे और इस दौरान उन्होंने 12 सभाएं की थीं। वर्ष 2025 वह सात बार बिहार आए और 14 चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया। तेजस्वी यादव ने 160 से अधिक सभाएं की तो 85 रैलियों के साथ चिराग पासवान दूसरे नंबर पर हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 70 जनसभाएं कर चुके हैं।मुख्यमंत्रियों में सबसे सक्रिय और सर्वाधिक मांग वाले स्टार प्रचारकों में रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
सीएम योगी ने 10 दिन में 30 रैली की
मुख्यमंत्रियों में सबसे सक्रिय और सर्वाधिक मांग वाले स्टार प्रचारकों में रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।उन्हेंने 10 दिन में 30 रैली व दरभंगा में प्रत्याशी के लिए रोड शो किया। भाजपा, जदयू, लोजपा (रा), हम और राष्ट्रीय लोकमोर्चा के कुल 43 प्रत्याशियों के समर्थन में एनडीए को जिताने की अपील की सीएम योगी ने 16 अक्टूबर को चुनाव प्रचार का आगाज किया था।
बिहार वालों को सर्वाधिक आकर्षित करने वाले स्टार प्रचारक के रूप में नजर आए ‘बुलडोजर बाबा’, छतों, दीवारों, पेड़, बुलडोजर पर खड़े होकर बिहारवासियों ने किया योगी आदित्यनाथ का सुना। उत्तर प्रदेश में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के कारण योगी आदित्यनाथ की बढ़ी मांग। योगी ने उत्तर प्रदेश व बिहार में सुशासन को गिनाया, जंगलराज, अपराध, भ्रष्टाचार पर कांग्रेस-राजद गठबंधन को धोया
प्रधानमंत्री ने 24 अक्तूबर को जननायक कर्पूरी ठाकुर के गांव में उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद अपनी सभा की शुरुआत की है। वहीं, अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने सीतामढ़ी और बेतिया मेंसभाएं कीं। प्रधानमंत्री ने इस बार हर दिन दो सभाओं को संबोधित किया, जबकि पिछले चुनाव में उन्होंने एक नवंबर, 2024 को चार सभाएं की थी। इसी प्रकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार तक 67 जनसभाओं को संबोधित किया। साथ ही उन्होंने रोड शो भी किया है। मुख्यमंत्री ने नौ सभाएं सड़क मार्ग से जाकर लोजपा आर के प्रमुख चिराग पासवान ने शनिवार तक 85 जनसभाएं की है।
तेजस्वी यादव ने सबसे अधिक रैलियां की
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष अब तक सबसे अधिक 160 से अधिक सभाएं कर चुके हैं। अंतिम दिन में सभी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की जनसभाएं की। इन नेताओं की सभाओं ने मतदाताओं को कितना प्रभावित किया है, इसका खुलासा तो 14 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा। मगर इतना जरूर है कि राजनेताओं ने मतदताओं का समर्थन पाने के लिए खूब पसीना बहाया है।



