भाजपा के गढ़ हाजीपुर में फिर खिलेगा कमल या जलेगा लालटेन! 

हाजीपुर में भाजपा का कमल फिर खिलेगा या राजद का लालटेन जलाएगा रोशनी? 2025 के चुनाव में NDA की लहर के बीच नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सबकी नजर।

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वैशली: वैशाली जिले का हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र बिहार की सियासत में एक मजबूत भाजपा गढ़ के रूप में जाना जाता है। यहां का जिला मुख्यालय होने के बावजूद, यह सीट वर्षों से भाजपा के कब्जे में रही है, जबकि राजद की कोशिशें हर बार नाकाम साबित हुई हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का यह परंपरागत क्षेत्र रहा, जहां से उन्होंने चार बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। अब उनके बाद अवधेश सिंह लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं। इस सीट का इतिहास स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने यहां से विधायक रहकर राज्य की कमान संभाली। भाजपा ने लगभग सात बार यहां बाजी मारी है, जो 2025 के विधानसभा चुनावों में फिर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

लोकतंत्र की जननी वैशाली

विश्व को गणतंत्र की पाठ पढ़ने वाली वैशाली की धरती राजनीतिक रूप से भी काफी समृद्ध रही है। वैशाली में लोकतंत्र की शुरुआत लगभग 600 ईसा पूर्व ही शुरू हो गई थी। वैशाली का नाम जैन और बौद्ध धर्म से जुड़े अनेक प्राचीन ग्रंथो में मिलता है, जिससे इसके गौरवशाली अतीत का पता चलता है।

हाजीपुर सीट पर 1951 में पहली बार चुनाव हुए थे

वर्ष 1951 में हाजीपुर सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के सरयुग प्रसाद ने निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद सिन्हा को 484 वोट से हराया था। 1957 और 1962 में भी हाजीपुर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली। दोनों बार कांग्रेस के दीप नारायण सिंह यहां से जीते। 1957 में उन्होंने निर्दलीय अमीर सिंह को 7,264 वोट से हराया। 1961 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के निधन के बाद दीप नारायण सिंह 17 दिन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री भी बने थे। बाद में उनकी जगह बिनोदानंद झा राज्य की कमान सौंपी गई। झा के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने 1962 का चुनाव लड़ा। 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस के दीपनरायन सिन्हा को हाजीपुर सीट से जीत मिली। उन्होंने भाकपा के किशोरी प्रसन्न सिन्हा को 1367 वोट से हरा दिया था।

हाजीपुर में भाकपा को भी मिली थी जीत

1967 के विधानसभा चुनाव में हाजीपुर से भाकपा को जीत मिली। भाकपा के केपी सिंह ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एमएस कामन को 7387 वोट से हरा दिया था। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के एसएन साहू रहे। 1969 में हाजीपुर से शोषित दल के मोतीलाल सिन्हा कानन को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के रामबाबू सिंह को 14,576 वोट से हराया। 1972 में भी मोतीलाल सिन्हा कानन जीते। इस बार सिन्हा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। उन्होंने कांग्रेस के गोपीनाथ पटेल को 24,505 वोट से हरा दिया। 1977 में मोती लाल सिन्हा कानन को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जेएनपी जगन्नाथ यादव ने कांग्रेस क मोती लाल सिन्हा कानन को 26238 वोट से हरा दिया था। 1980 में जगन्नाथ राय को जीत मिली। कांग्रेस (I) के जगन्नाथ राय ने कांग्रेस (U) के बासकित राय को 1239 वोट से हरा दिया था। 1985 में एक बार फिर दो चुनाव हारने के बाद मोतीलाल को जीत मिली। मुकाबला जगन्नाथ प्रसाद राय के साथ ही था, जो पिछले चुनाव में जीते थे। इस बार मोतीलाल कानन ने लोक दल से चुनाव लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस के जगन्नाथ प्रसाद राय को 18197 वोट से हरा दिया था।

1990 में जगन्नाथ का मुकाबला जगन्नाथ से था

1990 के विधानसभा चुनाव में हाजीपुर सीट पर दो जगन्नाथ के बीच मुकाबला हुआ। जिसमें जीत जगन्नाथ राय को मिली। कांग्रेस के जगन्नाथ राय ने निर्दलीय उम्मीदवार जगन्नाथ यादव को 13,240 वोट से हरा दिया था। इस चुनाव में भाजपा के नित्यानंद राय तीसरे स्थान पर थे। 1995 में मुकाबला जनता दल और भाजपा में था। जनता दल के राजेंद्र राय ने भाजपा के नित्यानंद राय को 25,867 वोट से हरा दिया था। साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में हाजीपुर सीट से भाजपा के नित्यानंद राय जीते। तब से अब तक इस सीट पर भाजपा नहीं हारी है। भाजपा के नित्यानंद राय लगातार चार बार यहां से जीते। 2000 में उन्होंने राजद के राजेंद्र राय को 52,836 वोट से हरा दिया। 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में नित्यानंद राय को जीत मिली। 2014 में भाजपा के टिकट पर नित्यानंद राय लोकसभा पहुंच गए। वह उजियारपुर लोकसभा सीट से जीते। जीते के बाद नित्यानंद राय ने यह सीट खाली कर दी। इसके बाद हाजीपुर विधानसभा सीट पर 2014 में उपचुनाव कराना पड़ा। इस उपचुनाव में फिर से भाजपा के उम्मीदवार को ही जीत मिली। भाजपा के अवधेश सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी। अवधेश इसके बाद 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में भी हाजीपुर सीट से विधानसभा पहुंचे। 2015 में भाजपा के अवधेश सिंह ने कांग्रेस के जगन्नाथ प्रसाद राय को 12,195 वोट से हरा दिया था। 2020 में मुकाबला भाजपा और राजद के बीच था। भाजपा के अवधेश सिंह ने राजद के देव कुमार चौरसिया को 2,990 वोट से हराया था।

यादव और राजपूत वोटरों का दबदबा

यादव और राजपूत वोटरों का दबदबा है। यहां करीब 19 प्रतिशत यादव मतदाता हैं। तो राजपूत मतदातों की संख्या भी 15 प्रतिशत के करीब है। वहीं 8% मुस्लिम वोटरों की भी आबादी अहम मानी जाती है। 2010 की तुलना में 2015 में वोटिंग प्रतिशत में मामूली बढ़त हुई थी। पिछले चुनाव में 57.2% वोटिंग हुई थी। जबकि 2010 में यह आंकड़ा 56.2% था.

मौजूदा विधायकः अवधेश सिंह, भाजपा
कुल वोटरः 3,52,082
पुरुष वोटरः 1.79 लाख (53.7%)
महिला वोटरः 1.54 लाख (46.2%)
ट्रांसजेंडर वोटरः 19 (0.005%)

SIR होने के बाद प्रकाशित वोटर लिस्ट के अनुसार, 125 हाजीपुर विधानसभा में पुरुष मतदाताओं की कुल संख्या 176058 है। वहीं महिला मतदाता की संख्या 157839 है, थर्ड जेंडर की संख्या 17, कुल मतदाता की संख्या -333914 है। इस बार हाजीपुर विधानसभा सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच चुनाव दिलचस्प होगा।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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