आरा। न्यूजी इंडिया: बिहार विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के एक बयान ने भाजपा की तपिश बढ़ा दी है। उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में भाजपा शीर्ष नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष नाराज़गी जाहिर करते हुए क्षत्रिय समाज के स्थानीय प्रतिनिधित्व देने का नया सियासी संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मौजूदा दलों में क्षत्रिय समाज की उपेक्षा जारी रही, तो वह स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के पक्ष में भी जा सकते हैं।
भाजपा नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल
आरके सिंह ने भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि कुछ दलों में क्षत्रिय समाज की भागीदारी नगण्य होती जा रही है। उन्हें यह कहने में कोई शर्म नहीं है कि मंचों से राजपूत समाज के नेता गायब हैं। जब तक हम संगठित होकर वोट नहीं करेंगे, तब तक हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मैंने कभी जातिवादी राजनीति नहीं की, लेकिन अब समाज को भी अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए।
भाजपा नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल
पूर्व मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आगामी चुनाव में क्षत्रिय समाज का समर्थन उसी गठबंधन के पक्ष में जाएगा जो उन्हें पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी देगा। हम देखेंगे कि कौन सा दल या गठबंधन क्षत्रिय समाज को कितनी टिकट देता है। वही तय करेगा कि समर्थन किसे दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन समाज की आवाज़ वे उठाते रहेंगे।
जातीय गोलबंदी बनाम समानता की राजनीति
इस बीच राजकुमार सिंह का बयान ऐसे समय आया हैं, जब बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने अन्य जातीय समूहों की एकता का हवाला देते हुए क्षत्रिय समाज से भी संगठनात्मक सोच अपनाने की अपील की। रामविलास पासवान ने दलितों को, लालू यादव ने यादवों को एक किया। हमारे समाज को भी उसी तरह संगठित होना पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि वे सभी जातियों को सम्मान करते हैं, और यह प्रयास समाज के सशक्तिकरण के लिए है, न कि किसी के खिलाफ।
भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी
राजकुमार सिंह ने बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नेताओं का शिक्षा स्तर चिंता का विषय है। मंत्रालय चलाने का काम अधिकारी करते हैं, मंत्री केवल हस्ताक्षर करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पदस्थापन के लिए पैसे खर्च करते हैं और बाद में जनता से वसूली करते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार और चरित्रहीनता के खिलाफ कड़ी भाषा का प्रयोग किया, लेकिन किसी पार्टी या व्यक्ति का नाम सीधे नहीं लिया। वहीं आरके सिंह की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक वरिष्ठ प्रशासनिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेता द्वारा जातीय सशक्तिकरण की मांग करना, राज्य की राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस बयान को क्षत्रिय समाज का समर्थन मिला, तो यह क्षेत्रीय सीटों पर असर डाल सकता है। हालांकि, यह अभी कहना जल्दबाजी होगा कि आरके सिंह नई पार्टी बनाएंगे।



