नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर वोटिंग होनी है। सीएम नीतीश कुमार के लिए पहला चरण काफी अहम होने वाला है, क्योंकि 121 में से 57 सीटों पर जदयू लड़ रही है। ऐसे में यह नीतीश कुमार के लिए करो या मरो का मुकाबला है। आगे की राह मुश्किल न हो इसके लिए नीतीश कुमार को ओपनिंग में ही बेहतरीन पारी खेलनी पड़ेगी।
राजद से मुकाबला
पहले चरण में 57 सीटों पर लड़ रही जदयू का ज्यादातर मुकाबला मुख्य विपक्षी दल राजद से होना है। पहले चरण में राजद के 71 उम्मीदवार मैदान में हैं। फर्स्ट फेज में जदयू 57 सीटों पर लड़ रही जबकि दूसरे फेज में 44 सीटों पर। 2020 के विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो जदयू के 43 में से 23 विधायक पहले चरण में ही जीते थे। इस लिहाज से नीतीश कुमार के लिए पहला फेज काफी अहम है।
अलग है ये चुनाव
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में खड़े हैं। सियासत उनके इर्द-गिर्द घूम रही है लेकिन यह चुनाव उनके लिए काफी अलग और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एनडीए में जेडीयू की भूमिका अब बड़े भाई की नहीं रही। भाजपा और जेडीयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, यानी बराबर-बराबर सीटें।
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पिछले चुनाव से बेहतर करें जदयू
पिछले चुनाव में जेडीयू को सिर्फ़ 43 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी कम सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद 74 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। बीजेपी के प्रदर्शन की बदौलत ही एनडीए सरकार बनी। इस बार बीजेपी ख़ुद अग्रणी भूमिका में है। इसलिए, जेडीयू के लिए अपना दबदबा बनाए रखने के लिए बिहार चुनाव जीतना बेहद ज़रूरी है। अगर इस बार जेडीयू बीजेपी से कम सीटें जीतती है, तो नीतीश कुमार के लिए सीएम पद हासिल करना मुश्किल भरा हो सकता है।



