नौकरी छूटी तो लगाया दिमाग, खड़ी कर दी 80 लाख की कंपनी

जो लोग अपने इरादों से चलते हैं, उन्हें बैसाखियों की जरूरत नहीं पड़ती। नन्दिकेश कुमार ने इसी कहावत को साबित कर दिखाया है।

Share This Article:

भागलपुर: एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छूटने से शुरू हुआ संघर्ष एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी में बदल गया। मेहनत, जुनून और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने अपनी कंपनी खड़ी की, जो आज 80 लाख के टर्नओवर के साथ नई ऊंचाइयों को छू रही है। यह है एक ऐसी यात्रा, जो हर सपने देखने वाले को प्रेरित करती है।
जी हां, कुछ ऐसा ही भागलपुर जिले के नवगछिया खरीक प्रखंड के तेलधी गांव के रहने वाले नन्दिकेश ने साबित कर दिखाया है। युवा उद्यमी नन्दिकेश कुमार की कहानी संघर्ष और प्रेरणा से भरी है। इससे युवाओं में एक नया जोश भरता है। परिवार की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए पढ़ाई बीच में छोड़कर घर से दो हजार किलोमीटर दूर जाकर मुम्बई में 15 हजार रुपये की सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की।
कोरोना-19 महामारी के दौरान जब देशभर में लॉकडाउन लगा और लाखों लोगों तरह नन्दिकेश की भी रोजी-रोटी छिन गई तो घर वापसी कर अपना कारोबार शुरू किया। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 80 लाख है। नन्दिकेश आज एक बैग बनाने वाली फैक्ट्री के मालिक है। वह अपनी कंपनी में 15 -20 लोगों को रोजगार दे रहे है।
इस काम में मददगार बनी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, जिसका लाभ उठाकर उन्होंने अपने लिए एक नई राह बनाई और दूसरों के लिए भी प्ररेणा का स्रोत बने। बच्चों में स्कूल बैग की बढ़ती मांग में उन्हें एक अवसर दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने कंपनी बनाकर बैग निर्माण शुरू किया और सफलता की नयी कहानी गढ़ने लगे। कंपनी का टर्नओवर मात्र दो साल में बढ़कर 80 लाख रुपये हो गया।
उद्यमी नन्दिकेश अपने बीते दिनों  को याद करते हुए बताते है कि मुंबई में जिस जगह वह सिक्योरिटी गार्ड की 15 हजार रूपये की नौकरी करते थे। वह बैग बनाने की फैक्ट्री थी। इस फैक्ट्री में 90 प्रतिशत श्रमिक बिहार के मधुबनी, मोतिहारी, सिवान, गोपालगंज और भागलपुर के रहने वाले थे।
नन्दिकेश ने बताया कि उन्हें एक बात हमेशा परेशान करती थी कि हम सब बिहारी घर से इतनी दूर मुंबई में बैग बनाने वाली एक फैक्ट्री में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। अगर ऐसी फैक्ट्री बिहार में हो तो घर से दूर जाना नहीं पड़ेगा। परिवार के सुख-दुख में साथ रहते। इस बीच कोरोना महामारी पूरे देश भर में पांव पसार दिया था। इसकी वजह से लॉक डाउन लग गया था। कोरोना के कारण नौकरी छूटी तो दो महीने तक मुम्बई में खाली बैठा था। अनिश्चितता का माहौल था, लग रहा था कि घर कभी लौट नहीं पाएंगे। तभी सरकार ने प्रवासियों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की, उसी श्रमिक ट्रेन से घर वापस आ गया, लेकिन जब घर लौटा तो अनिश्चितता का माहौल बना रहा, फिर भी किसी दूसरे राज्य में वापस नहीं जाना चाहता था। तभी प्रण किया जो भी करना है वह बिहार में की करना है।

बिना पृष्ठभूमि हासिल किया मुकाम
व्यवसाय में कोई पृष्ठभूमि नहीं होने पर भी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ, बिहपुर के अमरपुर में 5,000 रुपये प्रति माह पर एक मकान किराए पर लिया। मुंबई में सिक्योरिटी गार्ड के काम के दौरान जो तीन लाख रुपये बचाए थे। उस पैसे को लगाकर नवंबर 2020 में नोटबुक बनाने का काम शुरू किया, यहां तक कि अपने परिवार की कृषि भूमि को भी गिरवी रख दिया, जिससे कुल 5 लाख रुपये की राशि जमा हो गई। धीरे-धीरे कंपनी बनाई। फिर स्कूल बैग बनाने की फैक्ट्री लगाया। आज कंपनी का सालाना 80 लाख का टर्नओवर है। साथ ही दो दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया है।
उद्यमी का कहना है कि नोटबुक बनाने का जब कारखाना लगाया तो देशभर में दोबारा 2021 में दूसरा लॉकडाउन लगा तो दहशत में आ गए थे। डर था कि सब कुछ खो देंगे, जमा-पूंजी, जमीन सब चला जाएगा लेकिन जैसे ही लॉकडाउन हटा, कारोबार फिर से चल पड़ा। शुरुआती सफलता देखकर, मुद्रा योजना के तहत 10 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया, जो उन्हें दो किश्तों में मिली।

तिनका-तिनका जोड़ खड़ी की इमारत
इसके बाद बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण से  2200 स्क्वायर फुट जमीन ली और PMEGP योजना के तहत 25 लाख के लोन के लिए आवेदन किया, जो मंजूर हो गया। जनवरी 2023 में, उनका सपना भागलपुर में ऑन-यात्रा बैग्स नाम की एक फैक्ट्री के शुभारंभ के साथ पूरा हुआ, जो अब बिहार, झारखंड, असम और अन्य राज्यों को स्कूल बैग सप्लाई करती है। उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने मुंबई में बैग फैक्ट्री में काम करने वाले बिहार के मजदूरों से संपर्क किया सभी ने मेरे साथ काम करने की इच्छा जताई।
सभी अपने परिवारों से दूर रहकर थक चुके थे। सभी ने कहा अब हम घर पर ही काम करेंगे। उन्होंने कहा, अगर सरकार और सहयोग करे तो वह 200 लोगों को नौकरियां दे सकते हैं।  उन्होंने बताया बिहारी में भारत के सबसे कुशल श्रमिक रहते हैं। बस उन्हें सही अवसर नहीं मिल पाता है। वे बताते हैं कि व्यवसाय के शुरुआती दिनों में बाजार की प्रतिस्पर्धा, समय पर पेमेंट न मिलना और कच्चे माल की कमी जैसी समस्याएं थी, लेकिन हार नहीं मानी और आपदा को अवसर में बदला। आज वही चुनौती उनकी पहचान बन गई है।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.