बिहार विधानसभा चुनाव में अचानक आम आदमी पार्टी की एंट्री ने सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। अचानक ही पार्टी ने चुनाव मैदान में 11 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया। यही नहीं, ये भी घोषणा कर दी कि आप सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। महत्वपूर्ण ये है कि बिहार चुनाव लड़ने या उम्मीदवारों को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल या किसी अन्य सीनियर नेता की ओर से अब तक कोई बयान तक नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आप, बिहार में किस इरादे से चुनाव मैदान में उतर रही है ?
गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को अचानक ही आप उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आने से पहले कहीं कोई ऐसी सुगबुगाहट नहीं थी कि आप भी बिहार चुनाव के मैदान में उतरेगी। इस बारे में पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर भी किसी नेता की ओर कोई बयान नहीं आया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आप का बिहार में इरादा क्या है ? इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि आप जिस राज्य में चुनाव लड़ती है, उससे पहले वहां पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता पहले से ही दौरे करने लगते हैं और एक रणनीति के तहत चुनाव लड़ा जाता है। लेकिन पहली बार बिहार में अचानक उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आने से दूसरे राजनीतिक दलों को हैरानी हुई है।
हालांकि पार्टी के सीनियर लीडर बिहार विधानसभा चुनाव में कितने सक्रिय होते हैं, ये आने वाले दिनों में पता चलेगा लेकिन अब तक के संकेत ऐसे नहीं लग रहे कि आप अपने उम्मीदवारों के समर्थन में उतना बड़ा चुनाव अभियान चलाएगी, जैसा वह गोवा या गुजरात जैसे राज्यों में चलाती रही है।
जन सुराज पहले से ही
आम आदमी पार्टी के चुनाव में उतरने की इसलिए भी उम्मीद नहीं की जा रही थी, क्योंकि आप की तर्ज पर ही पहले से जन सुराज पार्टी राज्य में सक्रिय हो चुकी है। ऐसे में वहां आप के लिए उतना राजनीतिक स्पेस नहीं है, जितना उसके लिए दिल्ली के अलावा गोवा, हरियाणा, गुजरात जैसे राज्यों में है। जनसुराज पार्टी की कार्यशैली भी लगभग आप वाली ही है और वो भी लगभग उसी तरह के नारों का उपयोग कर रही है।
क्या हो सकता है मकसद ?
ऐसे में सवाल है कि आम आदमी पार्टी ने बिहार में अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला क्यों लिया ? जाहिर है कि इसकी एक वजह यही हो सकती है कि अचानक उम्मीदवार उतारने का फैसला उसने अपनी एक रणनीति के तहत किया हो ताकि अब तक उसने बिहार में अपना जो आधार बनाया है, उसे बचाकर रखा जा सके। वैसे ये भी एक तथ्य है कि पिछले लोकसभा चुनाव में आप भी इंडिया गठबंधन का ही एक घटक था। हालांकि बाद में आप इस गठबंधन से बाहर आ गई।
बिहार की राजनीति को नजदीक से जानने वालों का मानना है कि संभवत : पार्टी ने ये फैसला अपनी राज्य ईकाई के सुझाव पर किया हो। इसकी वजह ये है कि बिहार में भले ही आप का मजबूत संगठन न हो लेकिन उसका संगठन तो है ही। ऐसे में अगर राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी मैदान में नहीं उतरती तो उसके कार्यकर्ताओं के सामने संकट हो जाता है कि वे राज्य की राजनीति में ऐसे वक्त पर कैसे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखें। यही वजह है कि पार्टी ने तय किया होगा कि आप का राज्य स्तर का संगठन खुद ही इस बारे में फैसला करे। यही वजह है कि आप के राष्ट्रीय नेताओं ने अब तक कोई बयान नहीं दिया लेकिन उम्मीदवार खड़ा करने के लिए अपनी सहमति दे दी हो। ये भी पता चला है कि दिल्ली से आप के नेता अजेश यादव को बिहार के चुनाव की जिम्मेदारी दी गई है ताकि वे राज्य के नेताओं के साथ रणनीति तैयार करें। इससे ये फायदा होगा कि अगर बिहार में संगठन को बड़ी कामयाबी नहीं भी मिलती तो भी पार्टी की नाकामी पर सवाल नहीं उठेंगे।
दूसरे दलों का भी मामला
आप के सीनियर नेता शायद आगे भी बिहार चुनाव से खुद को दूर रखें,क्योंकि इसका असर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर न हो। काग्रेस से भले ही आप के मतभेद गहरे हों लेकिन अगर आप के सीनियर लीडर भी जुझारु तरीके से उतरते हैं तो इससे बिहार चुनाव से इतर दूसरे समान विचारधारा वाले दलों के साथ आप के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।



