नई दिल्ली: क्या भर्ती परीक्षा की OMR शीट में एक छोटी सी गलती आपकी नौकरी छीन सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब ‘ना’ में दिया है। एक ऐतिहासिक फैसले में, कोर्ट ने कहा है कि मामूली तकनीकी चूक पर किसी की उम्मीदवारी रद्द करना सरासर अन्याय है। जानिए कैसे एक महिला उम्मीदवार को छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला और यह फैसला लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक उम्मीद की किरण बन गया है।
पूरा मामला
- क्या हुआ था: दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने 2017 में TGT (स्पेशल एजुकेशन टीचर्स) के पद के लिए भर्ती निकाली थी। याचिकाकर्ता कुसुम गुप्ता ने लिखित परीक्षा पास कर ली थी।
- उम्मीदवारी रद्द: फरवरी 2019 में जारी अंतिम सूची से उनका नाम हटा दिया गया। कारण बताया गया कि उन्होंने अपनी OMR शीट में रोल नंबर भरने (बबलिंग) में गलती कर दी थी।
- कोर्ट का रुख: कुसुम गुप्ता ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद, जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
कोर्ट का अहम फैसला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब एक उम्मीदवार ने परीक्षा के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, तो केवल एक छोटी-सी तकनीकी गलती के आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद्द करना “कठोर और अनुचित” है। कोर्ट ने यह भी पाया कि कुसुम गुप्ता की OMR शीट का मूल्यांकन हुआ था और उन्हें सफल घोषित कर ई-डॉसियर अपलोड करने के लिए भी बुलाया गया था।
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अब क्या होगा
- नियुक्ति का आदेश: हाईकोर्ट ने DSSSB को आदेश दिया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर कुसुम गुप्ता को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (विशेष शिक्षक) के पद पर नियुक्ति पत्र जारी करे।
- सेवा लाभ: कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि उन्हें आनुमानिक वरिष्ठता और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएं। हालांकि, बकाया वेतन-भत्ते उनकी नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे।
यह फैसला उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है जो ऐसी ही तकनीकी गलतियों की वजह से अपनी नौकरी खो देते हैं। कोर्ट के इस आदेश से भर्ती एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लगने की उम्मीद है।



