MP, MLA से जुड़े मामलों की जांच में अब नहीं होगी देरी

डीजीपी ने सभी एसपी को निर्देश दिया है MP, MLA से जुड़े मामलों की जांच समय पर पूरी करें, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

Share This Article:

भागलपुर: MP, MLA और मंत्रियों से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच में होने वाली देरी पर अब लगाम लगेगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को निर्देश दिया है कि वे इन मामलों की जांच समय सीमा के भीतर पूरी करें। आदेश में कहा गया है कि जानबूझकर देरी करने वाले अनुसंधानकर्ताओं (इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स) पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

एसपी करेंगे मॉनिटरिंग, डीआईजी को देनी होगी रिपोर्ट

पुलिस मुख्यालय ने इस प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। सभी जिलों के एसपी को अब अपने-अपने जिले में लंबित “माननीयों” से जुड़े मामलों की स्वयं मॉनिटरिंग करनी होगी। उन्हें हर हफ्ते इन मामलों की प्रगति रिपोर्ट अपने रेंज के डीआईजी को भेजनी होगी, और डीआईजी इन रिपोर्टों की समीक्षा कर मुख्यालय को अवगत कराएंगे।
पूर्णिया के डीआईजी, प्रमोद कुमार मंडल ने बताया कि उनके रेंज में ऐसे सभी मामलों को प्राथमिकता से निपटाया गया है और कोई भी मामला लंबित नहीं है। यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव से पहले लंबित मामलों को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों पर हैं आपराधिक मामले

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामलों की संख्या काफी अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में बिहार के 45% से अधिक विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे आरोप शामिल हैं। वहीं, 38% सांसदों पर भी गंभीर आपराधिक मामले हैं। हालांकि, इन मामलों में से अधिकांश राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों, सरकारी काम में बाधा डालने या भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। इस नई पहल से न केवल जांच में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि माननीयों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। पटना हाईकोर्ट भी ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन पर जोर दे रहा है।
न्यायिक हस्तक्षेप: लंबे समय से, राजनेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों में जानबूझकर देरी की शिकायतें आती रही हैं। पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बार-बार निर्देश दिए हैं। यह खबर उसी न्यायिक दबाव और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है। जनप्रतिनिधियों पर लंबित मामले: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें लगातार यह दिखाती रही हैं कि बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों की धीमी जांच से अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि क्या नेताओं को उनके पद की वजह से विशेष छूट मिल रही है।
चुनाव और राजनीतिक दबाव: आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पहल की एक महत्वपूर्ण वजह है। चुनाव से पहले ऐसे मामलों को निपटाने से न केवल न्यायपालिका के सवालों का जवाब दिया जा सकेगा, बल्कि यह पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता को भी दर्शाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: नई व्यवस्था, जिसमें एसपी को सीधे मामलों की मॉनिटरिंग करनी होगी और डीआईजी को रिपोर्ट देनी होगी, का उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। यह सुनिश्चित करेगा कि मामलों को जानबूझकर लटकाया न जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।
गौरतलब है कि न्यायपालिका के दबाव, राजनेताओं पर लंबित मामलों की बढ़ती संख्या, और चुनावी माहौल में प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने की एक कोशिश है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.