पटना: चुनाव में प्रमुख यह होता है कि कौन दूसरे को अपने पीच पर खेलने के लिए बाध्य करता है। इस नीति में पहले तो कांग्रेस आगे चल रही थी, जब राहुल गांधी और तेजस्वी ने एसआईआर का मुद्दा उठाकर एनडीए को अपने पीच पर आने के लिए मजबूर कर दिया था। एनडीए का दिनभर समय एसआईआर पर जवाब देते ही बितता रहा, लेकिन अब पासा पलट गया है। इसका कारण है कि कभी भी कांग्रेस व महागठबंधन किसी भी मुद्दे को अंत तक बनाये रखने में असफल रहता है।
इस बीच तेजस्वी पर घरेलू कलह हावी होता जा रहा है तो वहीं कांग्रेस की जोरदार धमक की धार कुंद होती जा रही है। ताबड़तोड़ भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं का दौरा बिहार की सूर्खियां बनती जा रही है, जिससे तेजस्वी और कांग्रेस नीतिश व भाजपा के पीच पर खेलने को मजबूर हो गए हैं। अभी बिहार की महिलाओं को रोजगार के लिए दिया गया 10 हजार रूपये पर दिनभर तेजस्वी और प्रियंका गांधी उलझते नजर आये। प्रियंका का तो पूरा भाषण ही महिलाओं को यह समझाते बिता कि एनडीए की सरकार उनके साथ धोखा कर रही है और वह पैसे के बदले उनका वोट खरीदने के फिराक में है।
कमराबंद बैठकों का दौर शुरु
उधर भाजपा में कमराबंद बैठकों का भी दौर शुरु है। रणनीतियां लगातार बन रही हैं। अभी भाजपा ने बिहार चुनाव में अवैध घुसपैठियां, महिला सम्मान, मोदी का अपमान और मंदिर का मुद्दा को जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। यह मुद्दा हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए बनाया गया है, जिससे बहुसंख्यक समाज में फूट डालने से रोका जा सके। अब कांग्रेस व तेजस्वी भी अपना अभियान जाति आधारित तोड़-फोड़ को भूल चुके हैं और भाजपा नेताओं का दिनभर जवाब देते हुए देखे जा रहे हैं।
बूथ स्तर तक हमेशा अपने विचार पहुंचाने की है तैयारी
भाजपा के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक चुनाव का पूरा ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। बूथ स्तर तक अपने विचार को पहुंचाने, विपक्ष का काट समझाने के लिए पदाधिकारी मंडल और बूथ स्तर तक कई दौर की बैठक कर चुके हैं। हर मंडल स्तर के पार्टी पन्ना प्रमुखों तक का ग्रुप बनाया गया है, जिसके माध्यम से प्रचार सामग्री और विडियो भेजे जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार हो सके।
प्रोफेशनल हो चुकी है भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा अब हर स्तर से प्रोफेशनल हो चुकी है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के कार्यों पर ध्यान रखने के लिए उनसे हर कार्य का विडियो, फोटो अपलोड कराया जाता है। इसके साथ ही उन पर निगरानी रखी जाती है। गलतियों पर सलाह देने के लिए भी एक टीम तैयार है, जो मार्ग दर्शन करती रहती है।
भाजपा का 180 पार का है लक्ष्य, लेकिन यह नहीं बनेगा नारा
भाजपा ने इस बार सहयोगी दलों के साथ 180 पार का लक्ष्य बना रखा है। यह भी तय किया गया है कि लोकसभा चुनाव की तरह इसे चार सौ पार का नारा नहीं दिया जाएगा, जिससे विपक्ष को कुछ हौवा जमाने का मौका मिल सके। पदाधिकारियों को यह बता दिया गया है कि इसके लिए बूथ स्तर पर जाकर हर उच्च पदाधिकारी को रणनीति बनानी होगी। पन्ना प्रमुख को हर तरह से ट्रेंड करना होगा।
भावनात्मक ढंग से जोड़ने की रणनीति पर हो रहा काम
इस बार भाजपा भावनात्मक ढंग से जुड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। इसी रणनीति का हिस्सा रहा कि महिलाओं को रोजगार के लिए प्रदेश सरकार की योजना होने के बावजूद केन्द्र सरकार इस अवसर पर आये और महिलाओं से भावनात्मक अपील की तथा उनके लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की लम्बी फेहरिस्त गिना डाली।
हिन्दुत्व के एजेंडे को भाजपा देगी धार
इसके साथ ही हिन्दुत्व के एजेंडे को भी भाजपा आगे बढ़ाएगी। हर वक्त यह कोशिश कर रही है कि यह चुनाव बाहरी घुसपैठिये बनाम बिहारी, हिन्दुत्व बनाम अल्पसंख्यक, परिवार बनाम आमजन मुद्दा बना रहे। इसके लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी हर बड़े नेता को उठाने को कहा गया है, जिससे भावना को आगे बढ़ाया जा सके।
एक-एक विधानसभा के हिसाब से बन रही रणनीति
पार्टी का फोकस प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक चरणबद्ध जनसंपर्क अभियान चलाने पर है। इसके लिए पूरी टीम लगायी गयी है, जो पूरा खाका इसी सप्ताह में पूरा कर देगी और पार्टी उसी के हिसाब से बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को चौबिस घंटे सक्रिय बनाये रखने की कोशिश करेगी। सभी कार्यकर्ताओं को ये निर्देश दिया गया है कि वो सौ से अधिक बार विधानसभा में जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही वो वार्ड और पंचायत स्तर पर बैठकें करेंगे और ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे सम्मेलन करेंगे।
नीतीश नहीं नरेन्द्र मोदी होंगे प्रमुख चेहरा
इस चुनाव में भाजपा यह भी तय कर चुकी है कि बिहार चुनाव में नीतिश नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रमुख चेहरा होंगे। उन्हें ही सबसे बड़ा ब्रांड बनाकर डबल इंजन की सरकार, विपक्ष लाचार आदि नारों की गूंज बिहार में सुनाई देगी। सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि केन्द्र की बिहार में चलाई जा रही योजनाओं को तवज्जों दिया जाएगा। हर मुद्दे पर केन्द्र के कार्यों को गिनाने पर जोर दिया जाएगा।
धार्मिक आस्था से जोड़ने का हो चुका है प्रयास
पार्टी नेताओं का मानना है कि मोदी रैलियां और वर्चुअल सभाएं वोटरों को निर्णायक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। मंदिर इस चुनाव में भी मुद्दा होगा। मंदिर का अर्थ सिर्फ अयोध्या नहीं, बल्कि गया सहित बिहार के धार्मिक स्थल भी शामिल होंगे। सीतामढ़ी पर पहले ही डबल इंजन की सरकार फोकस कर चुकी है। काशी विश्वनाथ से भी बिहार के लोगों का काफी जुड़ाव है, इस कारण भाषणों में यहां के बने कारिडोर भी मुद्दों में शामिल होगा।
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छोटे मंदिरों का मुद्दा उठाकर भी नब्ज टटोलेंगी भाजपा
इसके साथ ही यहां के छोटे-छोटे मंदिरों और धार्मिक आयोजनों को को जोड़कर सीधे आस्थावान लोगों की भावनाओं को टटोलने का प्रयास चल रहा है। आस्था में तर्क-वितर्क की जगह नहीं होती। इस कारण भाजपा का मानना है कि इन मुद्दों का उठाने पर जैसे ही विपक्ष तर्क-वितर्क करेगा, वैसे ही हमारी पिच पर आने के लिए मजबूर हो जाएगा। यह ऐसा मुद्दा है कि इसके उठने के बाद पूरा राजनीक केंद्र यही हो जाएगा। यदि इसमें कोई प्रमुख मुद्दा उछलने का मौका मिल गया तो फिर भाजपा आगे निकलती चली जाएगी। महिला और युवा को अलग से टारगेट करने की रणनीति पहले से बन चुकी है।



