नयी दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी ) के भीतर रविवार को एक नए युग की औपचारिक शुरुआत हो गई। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से ‘राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष’ चुन लिया गया। इस फैसले के साथ ही लालू प्रसाद यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी की कमान और भविष्य की रणनीति अब पूरी तरह तेजस्वी के हाथों में होगी
संगठन पर बढ़ा तेजस्वी का दबदबा
पटना में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पार्टी नेताओं ने तेजस्वी के नाम पर मुहर लगाई। हालांकि तेजस्वी पिछले काफी समय से पार्टी के सभी बड़े फैसले ले रहे थे, लेकिन इस नियुक्ति ने उन्हें आधिकारिक रूप से लालू के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित कर दिया है। अब टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के प्रतीक चिन्ह (सिंबल) और झंडे से जुड़े विवादों को सुलझाने की पूरी शक्ति तेजस्वी के पास होगी।
खुशी के बीच ‘पारिवारिक कलह’ की कड़वाहट
एक ओर जहां तेजस्वी का कद बढ़ाया गया, वहीं उनकी बड़ी बहन रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलकर जश्न के माहौल में खलल डाल दिया। रोहिणी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में नेतृत्व पर सवाल उठाए।
उन्होंने लिखा, “लालूवाद को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी के भीतर ऐसे ‘घुसपैठिए’ घुस गए हैं जो विचारधारा को कमजोर कर रहे हैं।”
रोहिणी ने बिना नाम लिए तेजस्वी के करीबियों पर निशाना साधा और पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों में राजद के खराब प्रदर्शन के बाद से ही रोहिणी और तेजस्वी के बीच अनबन की खबरें आ रही थीं।
तेज प्रताप भी नहीं पीछे
सिर्फ रोहिणी ही नहीं, तेजस्वी के बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव भी पिछले कुछ महीनों से इशारों-इशारों में पार्टी नेतृत्व (तेजस्वी की टीम) को हार के लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक तरफ राज्य की राजनीति में राजद को फिर से खड़ा करना और दूसरी तरफ परिवार के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करना।
आगामी चुनावों की तैयारी
राजद नेताओं का कहना है कि यह नियुक्ति आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए की गई है। पार्टी को उम्मीद है कि तेजस्वी के आधिकारिक नेतृत्व में संगठन अधिक मजबूती और स्पष्टता के साथ काम कर पाएगा।



