नई दिल्ली: 2020 का चुनाव याद है आपको? कैसे तेजस्वी यादव ने हेलीकॉप्टर को ट्रैक्टर बना दिया था। एक दिन में तेजस्वी 12 से 15 जन सभाएं कर रहे थे लेकिन इस बार तेजस्वी का तेज शांत क्यों है, ये सवाल सबके मन में उठ रहा। आइये ढूंढते हैं इस सुस्ती के पीछे के कारण को….
कांग्रेस ने बिगाड़ा खेल
तेजस्वी यादव ने बड़े-बड़े एलानों और जनवादों की झड़ी लगाकर सबसे पहले चुनावी बिगुल बजाया था लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही है, महागठबंधन की गूंज धीमी मालूम पड़ती है। नीतीश कुमार बिना हल्ला मचाये कल से चुनावी मैदान में उतर गए हैं लेकिन तेजस्वी शांत हैं। सियासी गलियारों में इसकी चर्चा खूब हो रही कि कांग्रेस के साथ बिगड़ी तालमेल का असर प्रचार में भी दिख रहा है।
राहुल-तेजस्वी का वार
SIR को लेकर राहुल और तेजस्वी केंद्र सरकार पर हमलावर रहे हैं। बिहार में राहुल ने NDA पर चुनाव आयोग के साथ साठगांठ करके वोट चोरी करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे को खूब उछाला गया। तेजस्वी यादव ने बिहार अधिकार यात्रा के ज़रिए चुनावी नैरेटिव सेट कर दिया था। बेरोज़गारी, महंगाई, महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को सीधे ज़मीन से जोड़ा और बड़ा विजन सामने रखा।तेजस्वी ने अपनी अधिकार यात्रा में हर घर नौकरी, मुफ्त बिजली, महिलाओं को ₹2500 मासिक और पेंशन बढ़ोतरी के वादे किए। लेकिन महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान और कांग्रेस से मतभेद ने इस आक्रामक मुहिम को अचानक थमा दिया।
NDA को फायदा
राजनीतिक हलकों में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या महागठबंधन ने चुनाव से पहले ही NDA के लिए चीजें आसान कर दी है। दरअसल राजनीतिक जानकार महागठबंधन में चल रहे किच किच को अच्छा संकेत नहीं मान रहे हैं। राहुल गांधी शुरुआत में काफी एक्टिव दिख रहे थे लेकिन अब चुप्पी मार ली है। तीखे बयानबाजी करने वाले मल्लिकार्जुन खरगे का अलग मौन व्रत चल रहा है। मुकेश सहनी नाराज हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आपने देखा होगा कि कैसे तेजस्वी हेलीकाप्टर में उनके साथ बैठकर मछली खा रहे थे। इसपर बवाल भी खूब हुआ क्योंकि जिस दिन यह वीडियो आया, उस दिन नवरात्री का पहला दिन था।
कहां गया तेजस्वी का जूनून
2020 विधानसभा चुनाव में तेजस्वी ने एक दिन में रिकॉर्ड 19 रैलियां की थी। पूरे चुनाव के दौरान उन्होंने कुल 246 रैलियां की। हेलीकाप्टर से ताबड़तोड़ प्रचार करने की वजह से बीमार तक पड़ गए। फिर वो कमर में बेल्ट लगाकर व्हील चेयर से प्रचार करने पहुंच जाते हैं। 2020 में तेजस्वी के जिस जूनून को बिहार ने देखा वो फुर्ती इस बार नहीं दिख रही। पहले चरण के लिए 6 नवंबर को वोटिंग हैं। 26 से 28 अक्टूबर तक छठ महापर्व की व्यस्तता रहेगी। ऐसे में सिर्फ 6-7 दिन चुनाव प्रचार के लिए मिलेंगे। अब देखना ये होगा कि इतने वक़्त में तेजस्वी फिर से जोश दिखा पाएंगे।



