नई दिल्ली: रात के काले परदे पर एक चमकदार सितारा उभरने वाला है, जो न सिर्फ आंखें भर लेगा बल्कि दिल को भी छू जाएगा। 5 नवंबर 2025 की शाम से पूरे देश में, लेकिन गुजरात (Gujarat) में तो खास तौर पर, एक सुपरमून का कमाल देखने को मिलेगा। इस खगोलीय तमाशे को और रोमांचक बनाने के लिए गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (गुजकोस्ट) ने कमर कस ली है। गांधीनगर स्थित इस संस्था ने राज्य के हर जिले में अपने रीजनल साइंस सेंटर्स (आरएससी) और कम्युनिटी साइंस सेंटर्स (सीएससी) के जरिए ‘सुपरमून वॉचिंग’ इवेंट्स का ऐलान किया है। ये स्पेशल शो 4 से 6 नवंबर तक शाम को होंगे, ताकि हर उम्र के लोग इस ब्रह्मांडीय चमत्कार को करीब से महसूस कर सकें।
सुपरमून: चांद का ‘सुपरस्टार’ मोमेंट
सुपरमून को अगर आसान शब्दों में कहें तो यह वो फुल मून है जो पृथ्वी के बिल्कुल पास आकर चमकता है। वैज्ञानिक इसे ‘पेरिगी-सिजीजी’ कहते हैं, यानी चांद अपनी अंडाकार कक्षा में सबसे करीब के पॉइंट (पेरिगी) पर पहुंचता है और साथ ही फुल मून फेज में होता है। नतीजा? चांद आम पूर्णिमा से 14 फीसदी ज्यादा बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार नजर आता है। इस बार 5 नवंबर को चांद महज 3,57,000 किलोमीटर दूर होगा, जो 2025 का सबसे नजदीकी और चमकीला पल होगा। खगोल प्रेमी इसे साल का हाइलाइट मान रहे हैं।
गुजरात में धूम मचेगी: स्पेशल इवेंट्स की धूम
गुजकोस्ट के प्लान के मुताबिक, राज्यभर के साइंस सेंटर्स में एक्सपर्ट्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स की मौजूदगी रहेगी। दूरबीनों और हाई-टेक टेलीस्कोप्स से चांद को जूम इन करके देखने का मौका मिलेगा। एक्सपर्ट्स सरल हिंदी-गुजराती में बताएंगे कि चांद की यह दूरी पृथ्वी के ज्वार-भाटा को कैसे हलचल देती है, और सुपरमून पर थोड़े इंटेंस टाइड्स क्यों दिखते हैं। लेकिन चिंता न करें। ये ज्वार हमारे डेली लाइफ को ज्यादा इफेक्ट नहीं करेंगे। गुजकोस्ट का मकसद सिर्फ शो देखाना नहीं, बल्कि लोगों में साइंस की भूख जगाना है। स्टूडेंट्स को चांद की स्पीड, साइज और अर्थ से कनेक्शन समझाया जाएगा, जो स्कूल की किताबों से कहीं ज्यादा मजेदार लगेगा।
चार सुपरमूनों की लगातार सीरीज का दूसरा राउंड
यह सुपरमून अकेला नहीं घूम रहा है। यह अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 तक की चार लगातार सुपरमून चेन का पार्ट टू है। पहले वाला 7 अक्टूबर को आया, फिर 5 नवंबर, उसके बाद 4 दिसंबर और जनवरी में एक और। ऐसी बैक-टू-बैक सीरीज ब्रह्मांड में कम ही नजर आती है, इसलिए एस्ट्रोनॉमर्स इसे गोल्डन चांस बता रहे हैं। अगर आपने पहला मिस किया, तो ये मौके हाथ से न जाने दें।
ब्रह्मांड का संतुलन: सुपरमून से सीख
सुपरमून सिर्फ फोटोशूट का सब्जेक्ट नहीं है। यह पृथ्वी, चांद और सूरज के बीच ग्रेविटी डांस का लाइव शो है। चांद का पास आना, सूरज की लाइट का फुल रिफ्लेक्शन है। ये सब मिलकर हमें याद दिलाते हैं कि हमारा यूनिवर्स कितना सिम्फनी से चलता है। ऐसे इवेंट्स न सिर्फ आंखों का तड़का लगाते हैं, बल्कि साइंस थिंकिंग को भी बूस्ट देते हैं। गुजकोस्ट के इवेंट्स में फैमिलीज को इन्वाइट किया जा रहा है, ताकि बच्चे स्काई गेजिंग की आदत डालें और सवालों की बाढ़ लाएं।
साइंस को पॉपुलर बनाने की मुहिम
ये प्रोग्राम्स सिर्फ फैक्ट्स डंप करने के लिए नहीं। ये साइंस को स्ट्रीट लेवल पर ले जाने का तरीका हैं। गुजरात सरकार की यह इनिशिएटिव दिखाती है कि जब साइंस को फन से जोड़ा जाए, तो लोग खुद-ब-खुद जुड़ जाते हैं। स्टूडेंट्स यहां से निकलेंगे तो चांद को सिर्फ ‘मून’ नहीं, बल्कि एक लिविंग लेसन मानेंगे।
5 नवंबर की रात: फैमिली आउटिंग का बेस्ट प्लान
इस 5 नवंबर को रात का स्काई शो मिस न करें। गुजरात के साइंस सेंटर्स में स्पॉट्स लिमिटेड हैं, तो जल्दी रजिस्टर करें। या घर की छत से ही निहारें। चांद की वो एक्स्ट्रा ग्लो आपके दिन को स्पेशल बना देगी। ठंडी हवा, चमकता चांद और थोड़ी साइंस चैट परफेक्ट नाइट आउट। यह न सिर्फ नेचर का गिफ्ट है, बल्कि हमें बताता है कि ऊपर वाला आसमान कितना बड़ा सरप्राइज बॉक्स है।



