महाराजगंज: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में DM की ऑनलाइन मीटिंग में उस समय हंगामा मच गया, जब शिक्षा विभाग की ई-चौपाल में अचानक पोर्न वीडियो चलने लगा। जिला मजिस्ट्रेट संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में चल रही इस मीटिंग में महिला अधिकारी समेत कई लोग मौजूद थे, जो इस घटना से स्तब्ध रह गए। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आखिर क्या है यह पूरा मामला? आइए जानते हैं।
जानकारी के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में ऑनलाइन ई-चौपाल का आयोजन किया गया था। इस बैठक में बेसिक शिक्षा अधिकारी, बीईओ, हेडमास्टर, सरकारी टीचर और आम लोग जुड़े थे। इस दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिससे बैठक में मौजूद अधकारी असहल हो गए। दरअसाल एक यूजर, जिसने खुद को “जेसन जूनियर” के नाम से पेश किया, ने स्क्रीन शेयर की और अचानक एक अश्लील वीडियो चलाना शुरू कर दिया। बड़े स्क्रीन पर यह वीडियो देखकर मीटिंग में मौजूद लोग, खासकर महिला अधिकारी, बेहद असहज हो गई। खबरों के मुताबिक, महिला BSA इस दौरान कमरे से बाहर चली गईं। इतना ही नहीं, एक अन्य यूजर “अर्जुन” ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की, जिससे हंगामा और बढ़ गया।
दो अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज
काफी प्रयास के बाद स्क्रीन को बंद किया गया, लेकिन तब तक मामला गंभीर हो चुका था। DM ने तुरंत इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया और पुलिस अधीक्षक को फोन कर मामले की जांच साइबर सेल को सौंपने का निर्देश दिया। 9 अगस्त को BSA के आदेश पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कोतवाली थाने में दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 352, और 67(A) के तहत मुकदमा दर्ज कराया।
IP एड्रेस व डिजिटल साक्ष्यों को जुटा रही पुलिस
सदर कोतवाली के SHO सत्येंद्र राय ने बताया कि साइबर पुलिस की मदद से आरोपियों की पहचान के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग किया जा रहा है। IP एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का दावा किया गया है। इस घटना की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
यह घटना न केवल महाराजगंज बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे साइबर सुरक्षा की कमी बता रहे हैं, तो कुछ इसे ऑनलाइन मीटिंग्स के गलत इस्तेमाल का उदाहरण मान रहे हैं।



